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दो माह से फरार चल रहे हैं दोनों ही वनकर्मचारी, एसटीएसएफ ने घोषित किया है इनाम

बाघ के शव को बगैर प्रोटोकाल के जलाने का मामला
बालाघाट। बाघ की संदिग्ध मौत और उसके शव को बगैर प्रोटोकाल के जलाने के मामले में फरार चल रहे डिप्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे को बर्खास्त कर दिया गया है। सेवा से बर्खास्तगी के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। दोनों ही वनकर्मचारी पिछले दो माह से फरार चल रहे हैं। मामले की जांच कर रही एसटीएसएफ ने दोनों ही वनकर्मचारियों पर पांच-पांच हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है। लेकिन दोनों ही कर्मचारियों को एसटीएसएफ ने गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
जानकारी अनुसार वन परिक्षेत्र लालबर्रा के बहियाटिकुर बीट के वन कक्ष क्रमांक 443 में 27 जुलाई को पोटुटोला नहर के पास नाले में मरा बाघ दिखाई दिया था। डिफ्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे के कहने पर सुरक्षा श्रमिक चौकीदारों ने 29 जुलाई को लकड़ी एकत्रित कर बाघ के शव को जलाकर नष्ट कर दिया था। यह मामला 2 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद आनन-फानन में वन विभाग ने मामले की जांच शुरु की। विभाग ने 8 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया। 6 सुरक्षा श्रमिक चौकीदार हरिलाल, शिवकुमार, शैलेष, अनुज, मानसिंह और देवसिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। जबकि इसी मामले में डिफ्टी रेंजर टीकाराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे को निलंबित कर दिया था, जो कि अभी तक फरार चल रहे हैं। प्रकरण में प्रधान मुख्य वनसंरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने डीएफओ अधर गुप्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। विभाग ने जांच के लिए एसआईटी का गठन भी किया। इधर, इस मामले की जांच अब एसटीएसएफ कर रही है। जिसके चलते वन विभाग द्वारा गठित एसआईटी को भंग कर दिया गया है।
विभाग ने दोनों ही वनकर्मचारियों को दिया था अवसर
दोनों ही वनकर्मचारियों को बर्खास्त करने से पहले वन विभाग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। इसके लिए विभाग द्वारा डिप्टी रेंजर और वनरक्षक को नोटिस जारी किया गया था। बाघ की संदेहास्पद मौत और बगैर प्रोटोकाल के शव को जलाने की घटना इन कर्मचारियों के प्रभार वाले कार्यक्षेत्र की थी। इन दोनों कर्मचारियों द्वारा प्रकरण की जांच में किसी प्रकार का सहयोग एवं अन्य जानकारी साझा नहीं की जा रही थी। दोनों ही कर्मचारियों ने अपने-अपने मोबाइल नंबर भी बंद करके रखे हैं, जो कि सिविल सेवा आचरण अधिनियम के अतर्गत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। दोनों कर्मचारी 3 अगस्त से बिना सूचना दिए लगातार 10 सितम्बर तक अपने कर्तव्य पर उपस्थित नहीं हुए। इसके पूर्व भी उन्हें उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया था। इस मामले में दोनों ही कर्मचारियों ने जांच में कोई सहयोग प्रदान नहीं किया। जिसके चलते दक्षिण सामान्य वनमंडल के वनमंडलाधिकारी अधर गुप्ता ने इन दोनों कर्मचारियों को अंतिम बार समय देते हुए 10 सितंबर को नोटिस जारी कर दो दिनों के भीतर कर्तव्य पर उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। लेकिन दोनों ही कर्मचारी इस नियत समय में भी उपस्थित नहीं हुए। नोटिस में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि दो दिनों के भीतर उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ सेवा से पृथक करने की कार्यवाही की जाएगी। इस नोटिस के बाद ही अब दोनों ही कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
एसटीएसएफ भी नहीं कर पाई गिरफ्तार
बाघ के रहस्य मय मौत मामले में 3 अगस्त से फरार चल रहे डिप्टी रेंजर और वनरक्षक को एसटीएसफ भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। दरअसल, इस पूरे मामले की जांच एसटीएसफ कर रही है। एसटीएसएफ ने इस प्रकरण में संलिप्त 6 सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज कर उनके पक्ष की जांच पूरी कर ली है। लेकिन अब सेवा से बर्खास्त डिप्टी रेंजर और वनरक्षक का पक्ष नहीं ले पाई है, जिसके कारण जांच अधूरी ही है। हालांकि, एसटीएसएफ ने इस मामले में दोनों ही वनकर्मचारियों के खिलाफ पांच-पांच हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है।

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