
इस मामले की सुप्रीम कोर्ट 12 नवंबर को करेगा सुनवाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह 12 नवंबर को उस मामले की सुनवाई करेगा जिसमें अग्रिम जमानत के लिए सत्र कोर्ट का रुख किए बिना वादियों द्वारा सीधे हाईकोर्ट का रुख करने का मुद्दा उठाया गया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की युगलपीठ को बताया गया कि केरल में अग्रिम जमानत के करीब 80 फीसदी मामले पहले वहां के हाईकोर्ट में आते हैं।
8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यद्यपि हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट को गिरफ्तारी-पूर्व जमानत की याचिका पर विचार करने का समवर्ती क्षेत्राधिकार प्रदान किया गया है, लेकिन सभी कोर्ट के पदानुक्रम की मांग है कि इस तरह के उपाय का अनुरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति को सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट की उस प्रथा पर ध्यान दिया था, जिसमें वादी द्वारा सत्र कोर्ट में जाए बिना अग्रिम जमानत आवेदनों पर सीधे विचार किया जाता है।
पीठ ने कहा कि अब हम हर जगह ई-फाइलिंग की ओर बढ़ रहे हैं। किसी आरोपी को गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिए आवेदन दाखिल करने के लिए संबंधित अदालत में जाने की क्या जरूरत है…इसकी जरूरत नहीं है। न्याय मित्र ने कहा कि अग्रिम जमानत के लिए पहले सत्र कोर्ट का रुख करने से हाई कोर्टों में भीड़भाड़ कम होगी। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर के लिए तय कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को दो व्यक्तियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था, जिसमें केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाए बिना गिरफ्तारी-पूर्व जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट का रुख किया था।
