
जबलपुर। चायना पटाखों पर प्रतिबंध के बाद तेज आवाज वाले सुतली बम भी जनहित में नुकसानकारी हैं। तेज आवाज वाले सुतली बम जो कि 125 डेसीबल वाले होते हैं, इन्हें आम जनजीवन वाले रहवासी वाले इलाकों में फोड़ने की अनुमति नहीं होती लेकिन विगत कई वर्षो से शिवाकाशी के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आतिशबाज भी इन बमों का धडल्ले से निर्माण कर बेच रहे हैं और जिला प्रशासन मूक दर्शक बना देखता रह गया है। यह एक एहम सवाल है। कानफोड़ू आवाज के पटाखे बिक चुके हैं और शराबी, शरारती व अराजक प्रवृत्ति के कुछ मनचले इन बमों का इस्तेमाल कर लोगों की चैन में खलल डालेंगे। ऐन वक्त पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया, उस पर अमल कैसे हो पायेगा यह सोचने वाली बात हैं।
ज्ञातव्य है कि 125 डेसीबल से अधिक धमाके वाले बमों को फोड़ने की अनुमति जनहित में नहीं दी जाती। एनजीटी ने भी इस बात के सख्त निर्देश दिये है। जिला प्रशासन को कम से कम दो माह पूर्व से रखकर सुनिश्चत करनी चाहिए, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ। प्रशासन की कुंभकरणी नींद ने जहां इन तेज आवाज वाले बमों के सौदागरों को खूब जमकर चांदी कटवाई। अब शरारती तत्व भी इसका बेजा फायदा उठाने की फिराक में अभी भी सक्रिय हो गये है। इस बार इन फटाखों को बनाने वाली ब्राण्डेड कंपनियां शिवाकाशी फायर आयटम के अलावा छोटी कंपनियों एवं स्थानीय निर्माता की दीवाली के जश्न का फायदा उठाने इन फटाखों की खेप अपने विक्रेताओं तक पहुंचा चुके है। तेज धमाकों के साथ फूटने वाले बमों के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता इस बार भी आमजनों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। आम जनजीवन की सेहत पर प्रतिकूल असर डालने वाले इन फटाखों की बिक्री पर पूर्ण रोक लगाने की मांग हर बार प्रशासन नजर अंदाज करता रहा है। प्रशासन की खामोशी पर सवाल उठाए जा रहा है। तेज आवाज वाले फटाखें, जो सुतली बम और एटम बम के चलित नामों से जाने जाते है। इनकी कर्कश ध्वनि तासीर के लिए कितनी खतरनाक है। इसका अंदाजा शायद फटाखे फोड़ने वाले को भी नहीं है। इन बमों में इस्तेमाल किये जाने वाले घातक रसायनों के असर से त्वचा रोग, नेत्र रोग व दिल का दौरा तक पड़ने की संभावना रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो धमाके के बाद इन बमों से निकलने वाला धुंआ एलर्जी रोग एवं घुटन के अलावा फेंफडों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इन बमों का इस्तेमाल करने वालों में छोटे बच्चों के अलावा शरारती तत्व भी शामिल है। जो दीवाली में जुंए जीती रकम का जश्न मनाने कानफोडू बमों का खुलकर इस्तेमाल करते है। गौरतलब है कि 125 डेसीबल वाले बमों को बेचने वाले दुकानदार पर 1 लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है वहीं तेज आवाज के बमों का इस्तेमाल करने वालों के विरूद्ध धारा 223 के तहत जिला दण्डाधिकारी के आदेश का उल्लंघन करने पर राज्य सुरक्षा अधिनियम की कार्यवाही करने का भी प्रावधान है।
