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इन्दौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजयकुमार शुक्ला की एकल पीठ ने एक मामले में दस प्रतिशत पेंशन राशि एफआईआर दर्ज होने से रोके जाने के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई उपरांत अपने निर्णय में विभाग को उसे जारी करने के आदेश देते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के आधार पर पेंशन नहीं रोक सकते। कोर्ट ने साठ दिन में रोकी गई पेंशन एवं अन्य बकाया राशि जारी करने के आदेश दिए। याचिका पूरनसिंह बघेल की ओर से दायर की गई थी जो कि सब रजिस्ट्रार के पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने दायर याचिका में कोर्ट को बताया कि वह अप्रैल 2016 में वे रिटायर हुए थे। जिसके बाद विभाग द्वारा उनकी 90 प्रतिशत पेंशन राशि तो जारी कर दी, लेकिन शेष दस प्रतिशत राशि और अन्य बकाया यह कहते हुए रोक लिए कि उसके खिलाफ एक मामले में एफआईआर दर्ज है। याचिका सुनवाई दौरान उनकी ओर से नियमों का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि सिर्फ एफआईआर दर्ज होने के आधार पर पेंशन और अन्य बकाया नहीं रोक सकते। सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि एक रिटायर्ड शासकीय सेवक पर केवल एफआईआर दर्ज होने के आधार पर उसकी पेंशन एवं अन्य बकाया नहीं रोक सकते। अतः साठ दिनों के अंदर उनकी पेंशन और अन्य बकाया राशि जारी की जाएं।

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