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आगामी केरल विधानसभा चुनाव में वह राज्य की सत्ता में वापस लौट सकती है
नई दिल्ली। केरल में हुए स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद राजनीति के जानकारों ने इस बात पर चर्चा शुरू कर दी है कि क्या कांग्रेस के अच्छे दिन आने वाले हैं? केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने कुल 1,199 स्थानीय निकायों में से चार निगमों, 54 नगरपालिकाओं, सात जिला पंचायतों, 79 प्रखंड पंचायतों और 505 ग्राम पंचायतों में जीत हासिल की है। उनका प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहा है। इस चुनाव को केरल विधानसभा के लिए सेमीफाइलन माना जा रहा था। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीते माह बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के लिए यह एक राहत वाली खबर है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया था। उसे 99 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन उसके बाद के विधानसभा चुनावों में पार्टी पूरी तरह बेपटरी हो गई। पहले हरियाणा और फिर महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस को मात्र छह सीटें मिली। लेकिन, केरल से उसे राहत मिली है।
केरल से मिली राहत के बाद नया साल कांग्रेस के लिए अच्छा साबित होने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल, अगले साल मार्च-अप्रैल में केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुड्डिचेरी और असम में विधानसभा चुनाव होना हैं। इन चुनावों में कांग्रेस को खोने के लिए दांव पर बहुत कुछ नहीं लगा है। इन राज्यों में कही भी कांग्रेस सत्ता में नहीं है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ बीते एक दशक से सत्ता से बाहर है, लेकिन अब स्थानीय निकाय चुनाव से उसे उम्मीद जगी है कि अगले विधानसभा चुनाव में वह राज्य की सत्ता में वापस लौट सकती है।
केरल के बाद तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। तमिलनाडु एक बड़ा राज्य है और यहां डीएमके की सरकार है। कांग्रेस डीएमके की सहयोगी है, लेकिन वह सरकार में साझीदार नहीं है। मौजूदा परिस्थिति में तमिलनाडु में विपक्ष बंटा हुआ है। बीते लोकसभा चुनाव में भी डीएमके-कांग्रेस गठबंधन का प्रदर्शन शानदार था। यहां की सभी 39 लोकसभा सीट पर डीएमके-कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन का कब्जा है। इस राज्य में बीजेपी के लिए बहुत संभावना नहीं है।
पूर्वी भारत के दो राज्यों पश्चिम बंगाल और असम में अगले साल विधानसभा चुनाव है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच है1 राज्य में करीब 15 सालों से ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी सरकार है। राज्य में टीएमसी और बीजेपी के बीच 5 से 7 फीसदी वोटों का अंतर है। इस बार यहां ममता बनर्जी के खिलाफ 15 साल का एंटी इनकंबेंसी है। ऐसे में बीजेपी के सत्ता में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता यानी इस राज्य में भी कांग्रेस को खोने के लिए कुछ नहीं दिख रहा है।
कांग्रेस के लिए असम एक बहुत अहम राज्य है। यहां पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रही है लेकिन बीते 10 सालों से वह बाहर है। यहां बीजेपी के साथ उसकी कांटे की लड़ाई है। राज्य में विधानसभा की 126 सीटें हैं। मौजूदा वक्त में कांग्रेस के नेतृत्व वाले महाजोत गठबंधन के पास 50 सीटें हैं। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 75 सीटें हैं। इस राज्य में कांग्रेस के पास संगठन और जनाधार दोनों हैं। ऐसे में अगर यहां कुछ उलटफेर होता है तो कांग्रेस को पाने के लिए बहुत कुछ है।

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