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नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह ने भाजपा और आरएसएस के बीच के वैचारिक और संगठनात्मक संबंधों पर एक तीखा हमला किया है। आप सांसद ने आरएसएस की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर इस भाजपा की राजनीतिक ढाल करार दिया है। आप सांसद सिंह का तर्क है कि दोनों संगठन एक-दूसरे के पूरक हैं। भाजपा के सदस्य गर्व से खुद को स्वयंसेवक बताते हैं और आरएसएस ने ही भाजपा की नींव रखी है। उनका आरोप है कि भाजपा द्वारा विपक्षी पार्टियों को तोड़ने, भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर संघ ने हमेशा चुप्पी साधी रखी है। आप नेता के अनुसार, आरएसएस केवल एक सांस्कृतिक संगठन नहीं है, बल्कि वह जमीन पर भाजपा के लिए चुनावी मशीनरी की तरह काम करता है। इसके विपरीत, मोहन भागवत ने कोलकाता में संघ की एक स्वतंत्र पहचान पर जोर दिया। भागवत का कहना है कि संघ को भाजपा के चश्मे से देखना एक बड़ी गलती है। उनके अनुसार, आरएसएस को अन्य राजनीतिक या सेवा संगठनों के साथ तुलना करके नहीं समझा जा सकता। इसकी कार्यप्रणाली और उद्देश्य राजनीति से परे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग संघ को केवल भाजपा का विस्तार मानते हैं, वे संगठन की व्यापकता और उसके 100 साल के इतिहास को समझने में विफल रहे हैं। यह वाकयुद्ध तब समय में हो रहा है जब विपक्ष लगातार यह नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है कि संवैधानिक संस्थाओं और सांस्कृतिक संगठनों पर एक विशेष विचारधारा का प्रभुत्व बढ़ रहा है।

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