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उड़ीसा के विधायकों की 200 फ़ीसदी वेतन वृद्धि
भुवनेश्वर। उड़ीसा विधानसभा द्वारा विधायकों के वेतन में 200 फ़ीसदी से अधिक की वृद्धि की गई है। जिसके कारण यह मुद्दा अब विवादों में आ गया है। उड़ीसा की प्रति व्यक्ति आय मात्र 1. 6 लाख वार्षिक है। वहीं विधायकों को यहां पर 3.5 लाख प्रति माह वेतन प्राप्त होगा। विधायकों और सांसदों का वेतन और पेंशन बड़ी तेजी के साथ बढ़ रही है। वहीं आम आदमियों की वार्षिक आय विधायकों और सांसदों के मासिक वेतन की तुलना में बहुत कम है।
उड़ीसा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 10 दिसंबर को विधेयक के द्वारा विधायकों का मासिक वेतन और भत्ते 1। 1लाख से बढाकर 3.45 लाख कर दिया गया है। विधायकों के मूल वेतन में ₹35000 की वृद्धि की गई है। पूर्व विधायकों की पेंशन को बढ़ाकर 1.20 लाख मासिक किया गया है।
यह वृद्धि तब की गई है, जब उड़ीसा की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय मात्र 1.6 लाख है। उड़ीसा सबसे गरीब राज्य है।
उड़ीसा में आशा कार्यकर्ता ओर शिक्षक पिछले कई महीनो से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में उड़ीसा सरकार द्वारा कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है। सदन के अंदर विधायक और सांसद अपना वेतन पेंशन और सुविधाएं बढ़ाने के लिए बड़ी जल्दी-जल्दी निर्णय कर लेते हैं।
इन जन प्रतिनिधियों को प्रदेश की जनता किस हालत में रह रही है। उसकी जरा भी फिक्र नहीं होती है। उसको लेकर लोगों में नाराजी बढ़ने लगी है।
भारत में 9 प्रदेश ऐसे हैं। जिनकी वार्षिक प्रति व्यक्ति आय की तुलना में विधायकों का मासिक वेतन कई गुना ज्यादा है। इसको लेकर अब जनता में नाराजी देखने को मिल रही है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स का कहना है। यह हितों का टकराव है। निर्वाचित प्रतिनिधियों के वेतन निर्धारण मे वाहन भत्ते तथा अन्य सुविधाओं को लेकर जिस तरह से राज्य सरकार के खजाने में लगातार बोझ बढ़ाया जा रहा है। वहीं आम आदमी और छोटे कर्मचारियों की तरफ राज्यों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके कारण टकराव अब चरम सीमा पर पहुंचने लगा है।

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