
2013 को चौथी मंजिल से गिर गया था, सिर में आई थी गंभीर चोट
नई दिल्ली। पिछले 12 सालों से कोमा में पड़े 31 साल के युवक को इच्छामृत्यु देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन ने गाजियाबाद के हरीश राणा के माता-पिता से कोर्ट के कमेटी रूम में मिलकर बातचीत की थी। पिछली सुनवाई में पीठ ने कहा था कि इस मामले में निर्णय तक पहुंचने से पहले वह परिजनों से मिलकर वस्तुस्थिति जानना चाहेंगे। पीठ ने विशेषज्ञ डॉक्टर्स की दो-दो मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा है।
सूत्रों के मुताबिक कोर्ट के रिकॉर्ड में मौजूद उन रिपोर्ट्स में भी हरीश के ठीक होने की उम्मीद बहुत कम बताई है। राणा परिवार के वकील के मुताबिक हरीश पिछले करीब साढ़े 12 साल से बिस्तर पर ही सांसें ले रहा है। उसे विशेष तरल भोजन ट्यूब के जरिए दिया जा रहा है। न वो बोल पाता है, न कुछ जता पाता है। आंख खुल भी जाए तो उनमें कोई हरकत नहीं, यानी जड़ की तरह हो चुका है। उसकी पीठ में लेटे रहने से गहरे घाव हो चुके हैं।
जानकारी के मुताबिक हरीश चंडीगढ़ में बीटेक की पढ़ाई के दौरान 20 अगस्त, 2013 को चौथी मंजिल से गिर गया था उससे सिर में गंभीर चोट आई थी। दिमाग में चोट लगने से उसकी यह हालत हुई है वह कोमा में चला गया। उसके माता-पिता ने तीन साल पहले सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उसे गरिमापूर्ण जीवन तो नहीं मिल पाया कम से कम गरिमापूर्ण मौत तो मिल जाए। इसको लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।
इच्छामृत्यु का मतलब है किसी शख्स को उसकी इच्छा से मृत्यु दे देना होता है। इसमें डॉक्टर की मदद से उसके जीवन का अंत किया जाता है, ताकि उसे दर्द से छुटकारा मिल सके। इच्छामृत्यु दो तरह से दी जाती है। पहली- एक्टिव यूथेनेशिया यानी सक्रिय इच्छामृत्यु और दूसरी- पैसिव यूथेनेशिया यानी निष्क्रिय इच्छामृत्यु। एक्टिव यूथेनेशिया में बीमार व्यक्ति को डॉक्टर जहरीली दवा या इंजेक्शन देते हैं जिससे उसकी मौत हो जाए। वहीं पैसिव यूथेनेशिया में मरीज को इलाज रोक दिया जाता है, अगर वह वेंटिलेटर पर है तो वहां से हटा दिया जाता है, उसकी दवाएं बंद कर दी जाती हैं। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया को अपनी मंजूरी दी थी।
