Spread the love

महाभियोग मामले में संसदीय समिति के खिलाफ याचिका खारिज
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा को बड़ा झटका देते हुए महाभियोग प्रस्ताव से जुड़े मामले में उनके खिलाफ गठित संसदीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही जस्टिस वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही संसदीय समिति का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल जस्टिस वर्मा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा जजेज इन्क्वायरी एक्ट, 1968 के तहत गठित समिति की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि उनके खिलाफ हटाने के प्रस्ताव को राज्यसभा के उपसभापति ने खारिज कर दिया था, ऐसे में लोकसभा स्पीकर द्वारा एकतरफा तरीके से जांच समिति का गठन करना कानून के खिलाफ है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एस.सी. शर्मा की पीठ ने की थी। अदालत ने 8 जनवरी 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया गया। कोर्ट के इस फैसले से संसदीय समिति को जांच आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई है।
जस्टिस वर्मा की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतंगी ने दलील दी थी कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट की धारा 3(2) के तहत गठित यह समिति उनके समानता और निष्पक्ष प्रक्रिया के अधिकार का उल्लंघन करती है। उन्होंने कहा था कि संसद के दोनों सदनों में एक ही दिन हटाने के प्रस्ताव के नोटिस दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद लोकसभा स्पीकर ने बिना दोनों सदनों की समान प्रक्रिया के समिति का गठन कर दिया।
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय संसदीय पैनल का गठन किया था। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य को शामिल किया गया है।
यह मामला तब सामने आया था, जब पिछले साल मार्च में दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में भीषण आग लगने के बाद वहां से भारी मात्रा में अधजली नकदी बरामद होने का दावा किया गया था। आग के बाद मिले नोटों के बंडलों की ऊंचाई कथित तौर पर डेढ़ फीट से अधिक बताई गई थी। इस घटना के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने मामले का संज्ञान लेते हुए जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट में तबादला कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब महाभियोग प्रस्ताव से जुड़ी संसदीय जांच अपने अगले चरण में प्रवेश करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *