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नगर निगम अधिकारियों व ठेका कंपनी के बीच मिलीभगत से गड़बड़ी का आरोप
कटनी नगर निगम के पार्षद मिथिलेश जैन की ओर से दायर की गई है
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने कटनी में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में अनियमितता पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में राज्य शासन, नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, नगर तथा ग्राम निवेश के कमिश्नर, असिस्टेंट डायरेक्टर, कटनी नगर निगम आयुक्त, रामकी कंपनी, मैनेजमेंट आफ सालिड वेस्ट के प्लांट मैनेजर और ईओडब्ल्यू एसपी को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी को चार सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने निर्देश दिया गया है।
अपीलकर्ता नगर निगम, कटनी के पार्षद मिथिलेश जैन की ओर से अधिवक्ता मुकेश कुमार अग्रवाल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि कटनी में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए वर्ष 2015 में रामकी कंपनी को ठेका दिया गया था। नगर निगम के अधिकारियों और कंपनी के बीच गठजोड़ के जरिए फर्जी बिल लगाकर कंपनी को भारी राशि का भुगतान किया जा रहा है। नगर निगम कटनी और रामकी कंपनी के बीच सात मई, 2015 को रीजनल इंटीग्रेटेड सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार हर घर से कचरा संग्रहण कर नागरिकों को बिल देना अनिवार्य था। कचरे को छोटे वाहनों से सीधे कम्पैक्टर में डालकर प्लांट तक ले जाना था। कचरे का सेग्रीगेशन यानि छंटाई करना जरूरी था। बिल जारी न होने के बाद भी नगर निगम ने कम्पनी को भुगतान किया और बाद में राशि प्रापर्टी टैक्स में जोड़कर जनता से वसूली की जा रही। तीन लाख मीट्रिक टन कचरा उस कृषि भूमि पर डंप किया गया, जो प्लांट के लिए आवंटित नहीं थी। यह मास्टर प्लान का उल्लंघन था। इन अनियमितताओं की शिकायतें नगर निगम, प्रशासन, पुलिस और ईओडब्ल्यू तक की गईं। वर्ष 2023 में शिकायत दर्ज होने के बावजूद न तो प्रारंभिक जांच पूरी हुई और न ही एफआइआर दर्ज की गई। हाई कोर्ट की एकलपीठ से राहत न मिलने पर यह अपील दाखिल करके नगर निगम अधिकारियों, रामकी कंपनी के निदेशकों और प्लांट प्रभारी के खिलाफ आर्थिक अनियमितता, पर्यावरण उल्लंघन और सरकारी धन के दुरुपयोग पर केस दर्ज करने की मांग हाई कोर्ट से की गई है। कचरा ढोने वाले वाहनों से निर्माण सामग्री ढोकर वजन के आधार पर भुगतान लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, रेलवे और आर्डनेंस फैक्ट्री के कचरे को भी उसी स्थल पर डंप कर कंपनी द्वारा तीन गुना भुगतान लिया जा रहा है।

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