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इन्दौर। भागीरथपुरा इन्दौर नगर निगम द्वारा सप्लाई दूषित पानी से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को 75 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक और कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष राजाराम बौरासी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे इस त्रासदी में मरने वालों का आंकड़ा 28 तक पहुंच गया। कई अन्य मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
इससे पहले शुक्रवार को भागीरथपुरा में इन्दौर नगर निगम द्वारा सप्लाई पानी से 63 साल के बद्री प्रसाद ने दम तोड़ा था। उन्हें 4 जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण एमवाय अस्पताल में एडमिट किया था। वहां चार दिन रहने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया था। 17 जनवरी को हालत खराब होने पर अरबिंदो अस्पताल ले गए। शुक्रवार दोपहर को उनकी मौत हो गई। वहीं गुरुवार रात को विद्या बाई उम्र बयासी साल की अरबिंदो अस्पताल में मौत हो गई थी। उनके बेटे शिवनारायण के अनुसार मां को 10 जनवरी से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। घर पर इलाज चल रहा था। मंगलवार को कमजोरी बढ़ने से वे बाथरूम जाने के दौरान गिर गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। ज्यादा उम्र और कमजोरी के कारण सर्जरी नहीं हो सकती थी इसलिए उन्हें घर ले गये थे गुरुवार रात को फिर तबीयत बिगड़ी तो उन्हें अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया था जहां 2 घंटे बाद उनकी मौत हो गई। इसी दुखद क्रम में आज भागीरथपुरा की बौरासी गली में रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक राजाराम बौरासी की लगातार इलाज के बाद आज सुबह मौत हो गई। उनके बेटे का कहना है कि 3 जनवरी से उल्टी-दस्त और निमोनिया के साथ-साथ कई अन्य परेशानियों से वे जूझ रहे थे। उन्हें पहले शैल्बी और फिर बाद में सुपर स्पेशलिटी में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। उन्हें पहले उल्टी-दस्त के चलते क्षेत्र के संजीवनी क्लिनिक से भी दवाइयां दी गई थीं।
उधर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि भागीरथपुरा में जितने भी लोगों की किसी भी बीमारी से यदि कोई मौत हो रही है तो उसकी वजह गंदा पानी बताया जा रहा है। विभाग का कहना है कि आज हुई मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मृतक हार्ट के पेशेंट थे। वही उच्च रक्तचाप और डायबिटीज से भी ग्रस्त थे वर्तमान में भर्ती दस्तावेजों के अनुसार उन्हें किसी भी प्रकार की उल्टी दस्त की शिकायत नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि 2018-19 की एंजियोग्राफी रिपोर्ट के अनुसार राजाराम बौरासी हृदय रोग से पीड़ित थे। उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की समस्या भी थी। उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों में उल्टी-दस्त की पुष्टि नहीं होती है।
राजाराम बौरासी लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन विकास समिति और रेलवे पुलिस सुरक्षा समिति के सक्रिय सदस्य भी थे। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हालात बिगड़े तो उन्होंने प्रशासन और रहवासियों के साथ समन्वय बनाने का काम किया। कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शनों में शामिल रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार, संकट की घड़ी में बौरासी ने पीड़ित परिवारों की आवाज शासन तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया। वे प्रदेशभर के अनुदान प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे।
ज्ञात हो कि भागीरथपुरा के निवासियों ने महीनों पहले से पानी से बदबू आने की शिकायत की थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। जांच रिपोर्टों में पुष्टि हुई है कि पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में सीवर का पानी मिलने से प्रदूषण हुआ, संभवतः एक पुरानी और लीक हो चुकी पाइपलाइन या सार्वजनिक शौचालय के पास रिसाव के कारण। पानी के नमूनों में ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पाया गया, जिससे डायरिया और उल्टी-दस्त जैसी गंभीर बीमारियां हुईं। इस मामले में इंदौर नगर निगम के दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और कमिश्नर का तबादला कर दिया गया था। वहीं पुरानी पाइपलाइन की मरम्मत का काम चल रहा है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने इसे सरकारी लापरवाही बताया है और जिम्मेदार अधिकारियों व महापौर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

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