
मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का, सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा में बैठाने का दिया आदेश
नई दिल्ली। छात्र को टीचर्स का मीम बनाना भारी पड़ गया। छात्र को स्कूल ने परीक्षा देने से रोक दिया। दसवीं की बोर्ड परीक्षा होने से छात्र के परिजन मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने छात्र को परीक्षा में बैठने देने का आदेश दिया। हालांकि, छात्र को स्कूल पहले ही रस्टिकेट कर चुका है। यह मामला मध्य प्रदेश के इंदौर शहर का है।
मीडिया रिपोर्ट के मताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत देते हुए एडमिट कार्ड जारी करने का निर्देश दिया। छात्र को शिक्षकों के आपत्तिजनक मीम शेयर करने के आरोप में स्कूल से निकाल दिया गया था। जानकारी के मुताबिक शिक्षकों के संबंध में आपत्तिजनक मीम शेयर करने के आरोप में रस्टिकेट इंदौर के नाबालिग छात्र को दसवीं की परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल गई है। कोर्ट ने कहा कि एक स्कूल के रूप में आपको बच्चे को सुधारने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी, लेकिन आपने यह कहकर कि वह खराब लड़का है, उसे बाहर कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि छात्र पहले ही सीआईएससीई के साथ परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुका है। उसे अनुमति नहीं दी गई तो उसका एक साल खराब हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में हम सीआईएससीई को निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता के बेटे को एडमिट कार्ड जारी कर 17 फरवरी से परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए। विवाद की प्रकृति को देखते हुए स्कूल को यह स्वतंत्रता होगी कि वह छात्र को अन्य स्टूडेंट्स के साथ नहीं, बल्कि अलग कक्ष में परीक्षा देने की अनुमति दे।
