
भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में भी हिली धरती, बड़े नुकसान की खबर नहीं
नई दिल्ली। रविवार सुबह भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में भूकंप के कई झटके लगे। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कुल चार झटके दर्ज किए गए, जिनमें से तीन सिक्किम और एक त्रिपुरा में आया। सिक्किम के नामची में सुबह 5:26 बजे और फिर 6:58 बजे 2.4 तीव्रता के दो झटके महसूस किए गए, जबकि मंगन में सुबह 5:10 बजे 2.2 तीव्रता का भूकंप आया। इसके साथ ही त्रिपुरा के गोमती जिले में भी सुबह 6:38 बजे 2.6 तीव्रता का झटका आया। राहत की बात यह है कि इन झटकों की तीव्रता कम थी और केंद्र जमीन से केवल 5 से 10 किलोमीटर की गहराई में था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। अफगानिस्तान में सुबह 4:28 बजे 4.3 तीव्रता का सबसे तेज झटका महसूस आया, जिससे वहां हल्के नुकसान की खबरें है, हालांकि किसी जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है। इसके अलावा म्यांमार में तड़के दो बार 3.2 तीव्रता के झटके लगे। अमेरिका के ओक्लाहोमा, इंडोनेशिया के जावा, चिली और पुर्तगाल के अजोरेस द्वीप समूह में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। सीस्मोलॉजिकल सेंटर के मुताबिक पुर्तगाल में आए भूकंप की तीव्रता 2.6 मापी गई।
विशेषज्ञों के मुताबक रविवार को आए इन झटकों से कहीं भी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। सिक्किम और त्रिपुरा में आए भूकंप के झटके हल्के थे, जिनसे जनजीवन पर कोई खास असर नहीं पड़ा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भूकंप हमेशा एक बड़ी चिंता का विषय है। आंकड़ों पर नजर डालें तो दुनिया भर में भूकंपों के कारण हर साल औसतन 40 से 60 अरब डॉलर यानी करीब 3 से 5 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। 2011 में जापान का तोहोकू भूकंप और 2023 में तुर्की-सीरिया में आई तबाही इसके भयावह उदाहरण हैं।
बता दें सालाना आधार पर भूकंप के कारण औसतन 10,000 से 20,000 लोगों की मौत हो जाती है, लेकिन यह संख्या आपदा की तीव्रता के आधार पर बदलती रहती है। जानकारों का कहना है कि अक्सर भूकंप खुद उतना खतरनाक नहीं होता, जितना कि कमजोर इमारतों का गिरना, आग लगना, सुनामी या भूस्खलन नुकसान पहुंचाते हैं। आज की घटनाओं ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने की जरुरत को दोहराया है।
