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जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों की एक प्रति भी दिखाई
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चीन के साथ लद्दाख गतिरोध से निपटने के तरीके को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक नाजुक समय में जिम्मेदारी लेने में विफल रहे और सैन्य नेतृत्व को अकेला छोड़ दिया। राहुल गांधी ने कहा, जो उचित समझो वहां करो। संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए, राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों की एक प्रति दिखाकर कहा कि वहां लोकसभा में प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से यह पुस्तक सौंपने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि पुस्तक की सामग्री लद्दाख संकट के दौरान मोदी सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में सच्चाई दिखाती है।
राहुल गांधी ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री मोदी में आज लोकसभा आने की हिम्मत होगी, क्योंकि अगर वह आते हैं, तब मैं उन्हें यह पुस्तक सौंपने जा रहा हूं। अगर प्रधानमंत्री आते हैं, तब मैं स्वयं जाकर उन्हें यह पुस्तक सौंपूंगा ताकि वे इस पुस्तक को पढ़ सकें और देश को सच्चाई पता चल सके। पूर्व सेना प्रमुख के वृत्तांत का हवाला देकर कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि पुस्तक में लद्दाख की घटनाओं का विस्तृत वर्णन है और इस पुस्तक को व्यापक रूप से पढ़ा जाना चाहिए, विशेषकर भारत के युवाओं को ये पुस्तक पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के हर युवा को यह पुस्तक देखनी चाहिए।
राहुल गांधी ने पुस्तक में वर्णित मुख्य घटना का वर्णन किया, जो कैलाश रिज क्षेत्र में चीनी सैनिकों और टैंकों की आवाजाही से जुड़ा है। राहुल गांधी ने कहा कि जब चीनी टैंक कैलाश रिज पर पहुंचे, तब जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क कर जवाबी कार्रवाई के बारे में निर्देश मांगे। उन्होंने कहा कि मुख्य बात वही है जो प्रधानमंत्री ने कही थी, जो उचित समझो वहां करो। जब पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने राजनाथ जी को फोन कर कहा कि चीनी टैंक कैलाश रिज पर पहुंच गए हैं, तब हमें क्या करना चाहिए? पहले रक्षा मंत्री सिंह ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया।
उन्होंने दावा किया कि जनरल नरवणे ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा मंत्री से भी संपर्क किया, लेकिन शुरू में उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। फिर उन्होंने राजनाथ सिंह को फिर से फोन किया। राजनाथ सिंह ने उनसे कहा कि वे शीर्ष अधिकारियों से पूछता हूं।

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