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बरेली। यूजीसी बिल और माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई कथित अभद्रता के विरोध में इस्तीफा देने वाले चर्चित पीसीएस अधिकारी और पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बरेली पहुंचे अग्निहोत्री ने मीडिया से रूबरू होते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इस्तीफे के बाद उन्हें निलंबित कर चार्जशीट थमाना उनकी आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी के इस्तीफे के जवाब में निलंबन और चार्जशीट की कार्रवाई की जाती है? अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि वे इस कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेंगे और जल्द ही हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर अपने निलंबन को चुनौती देंगे।
अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से कर डाली। उन्होंने कहा कि तंत्र का उपयोग उनकी सत्य की आवाज को कुचलने के लिए किया जा रहा है। अपनी भविष्य की रणनीति साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद लेने और प्रयागराज में वरिष्ठ वकीलों से कानूनी विमर्श करने के बाद वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट को सामान्य वर्ग के लिए काला कानून करार देते हुए केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अग्निहोत्री की मांग है कि सरकार इस कानून को समाप्त करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो वे आगामी 7 फरवरी को दिल्ली कूच करेंगे और वहां एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। राजनीति में आने की अटकलों पर विराम लगाते हुए पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि फिलहाल उनका किसी राजनीतिक दल में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि सेवाकाल के दौरान प्रशासनिक पदों पर रहने के कारण सभी दलों के नेताओं और किसान यूनियनों से उनके अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन उनकी वर्तमान प्राथमिकता केवल एससी-एसटी एक्ट को रद्द कराना है। उन्होंने कहा कि वह अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए दिल्ली में अपनी आवाज बुलंद करेंगे। फिलहाल, एक प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह बागी रुख अपनाकर सड़क पर उतरने का फैसला प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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