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जबलपुर। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक रुसिया और न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित बायोमेट्रिक और आधार डाटा से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी कांस्टेबल को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। आरोपी कांस्टेबल पर आरोप है कि उसने वर्ष 2023 को कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में बायोमेट्रिक और आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर दूसरे से परीक्षा दिलाकर पास हुआ।
मुरैना के साईपुरा में रहने वाले आरोपी रामगोपाल मीणा की ओर से यह अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। उसके खिलाफ भोपाल के साइबर एवं हाईटेक क्राइम थाना में भारतीय न्याय संहिता , आईटी एक्ट, आधार अधिनियम और परीक्षा अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है। उसपर आरोप है कि वर्ष 2023 की पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में उसका चयन हुआ था। जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा के पहले आरोपी रामगोपाल ने अपने आधार कार्ड में बदलाव कराकर सह-आरोपियों के साथ मिलकर बायोमेट्रिक व फोटो बदलवाए। उसके बाद दूसरे व्यक्ति ने उसकी जगह परीक्षा दी और आरोपी को चयन का लाभ मिला। मामले में सह-आरोपी आशीष कुमार के बयान का भी उल्लेख है, जिसमें उसने कथित रूप से आरोपी की जगह परीक्षा देने की बात कही।
कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत नहीं ……………
आरोपी के वकील की दलील थी कि आधार में केवल माता-पिता के नाम की त्रुटि सुधारी गई थी। कोई दुर्भावना या साजिश नहीं थी। पूरा मामला दस्तावेजों पर आधारित है, इसलिए कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत नहीं। आरोपी रामगोपाल को केवल सह-आरोपी के मेमो के आधार पर फंसाया गया है।
बायोमेट्रिक से छेड़छाड़ गंभीर अपराध………….
हाईकोर्ट ने केस डायरी का अवलोकन करते हुए कहा कि सह-आरोपी ने बयान में स्वीकार किया है कि उसने आरोपी की जगह परीक्षा दी। बायोमेट्रिक से छेड़छाड़ गंभीर अपराध है। जांच के लिए आरोपी की उपस्थिति जरूरी है, ताकि फिंगरप्रिंट व अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान किया जा सके। इसके साथ ही अदालत ने अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया।

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