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हाईकोर्ट ने जूनियर असिस्टेंट पद के उम्मीदवार की याचिका खारिज की
इंदौर। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायाधीश जेके पिल्लई की की एकलपीठ ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआाई) में जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विसेज) पद के लिए चयन प्रक्रिया से बाहर किए गए अभ्यर्थी की याचिका इस मत के साथ खारिज कर दी कि भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित कट-ऑफ तारीख तक आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होना अनिवार्य है और इसके पालन में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती।
योगेंद्र सिंह गुर्जर की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (वेस्टर्न रीजन) ने 11 फरवरी 2025 को विज्ञापन जारी कर नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों पर भर्ती निकाली थी। इसमें जूनियर असिस्टेंट (फायर सर्विसेज) पद के लिए केवल महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और गोवा के डोमिसाइल अभ्यर्थियों को पात्र माना गया था। आवेदन की अंतिम तिथि 24 मार्च 2025 निर्धारित थी। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि समय सीमा के भीतर आवेदन तो कर दिया, लेकिन आवेदन के दौरान अपना डोमिसाइल प्रमाणपत्र अपलोड करने के बजाय अपने पिता का डोमिसाइल प्रमाणपत्र (2016) अपलोड कर दिया। बाद में उसने 6 जून 2025 को आयोजित कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) पास कर ली। इसके बाद उसे 31 जनवरी 2026 को वडोदरा एयरपोर्ट में दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। सत्यापन के दौरान उसने अपना डोमिसाइल प्रमाणपत्र दिनांक 5 जनवरी 2026 प्रस्तुत किया, जिसे समिति ने स्वीकार नहीं किया और उसकी उम्मीदवारी रद्द कर दि 31 जनवरी 2026 को वेरिफिकेशन कमेटी द्वारा उसकी उम्मीदवारी खारिज किए जाने के निर्णय को रद्द करने की मांग को लेकर उक्त याचिका दायर की गई। साथ ही उसने न्यायालय से अनुरोध किया था कि उसके डोमिसाइल प्रमाणपत्र को स्वीकार कर उसे चयन प्रक्रिया के शेष चरणों में शामिल होने की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विज्ञापन में डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी होने की कोई कट-ऑफ तारीख नहीं बताई गई थी। साथ ही डोमिसाइल प्रमाणपत्र केवल स्थायी निवास का प्रमाण होता है और यह पहले से मौजूद स्थिति को ही दर्शाता है। यह भी तर्क दिया गया कि उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड, समग्र आईडी और पिता के डोमिसाइल प्रमाणपत्र से यह स्पष्ट है कि वह मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी है।
मामले में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और अधिवक्ता कुशाग्र जैन ने दलील दी थी कि विज्ञापन की शर्तों के अनुसार कट-ऑफ तारीख से पहले उम्मीदवार का स्वयं का वैध डोमिसाइल प्रमाणपत्र अपलोड करना अनिवार्य था। याचिकाकर्ता ने आवेदन के समय गलत दस्तावेज अपलोड किया, जिससे वह पात्रता की शर्त पूरी नहीं कर पाया। यह भी बताया गया कि करीब 15 अन्य अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी भी इसी आधार पर खारिज की गई थी।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता वर्ष 2025 में आवेदन के समय वयस्क था, इसलिए उसके पिता का डोमिसाइल प्रमाणपत्र उसकी पात्रता साबित नहीं कर सकता। भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेज कट-ऑफ तारीख से पहले होना और अपलोड करना अनिवार्य है। एकलपीठ ने यह भी कहा कि यदि एक अभ्यर्थी को राहत दी जाती है तो यह अन्य अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव होगा, जिन्होंने नियमों का पालन किया या इसी कारण से बाहर कर दिए गए। इन परिस्थितियों में माना गया कि उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द करने में कोई मनमानी या असंवैधानिकता नहीं है। इसके साथ ही न्यायालय ने याचिका को निराधार बताकर खारिज कर दिया।

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