
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मंदिरों में पशुओं की बलि पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कोर्ट से धार्मिक परंपराओं के नाम पर जानवरों की बलि पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पशुपालन मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट में यह पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन एडवोकेट श्रुति बिष्ट की ओर से दाखिल की गई है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिरों में पशु बलि के मामलों में सरकार की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। याचिका के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई मामलों में कह चुका है कि हर तरह के ‘जीव’ को जीवन का अधिकार है। संविधान में भी जीवन के अधिकार की बात कही गई है। याचिका में कहा गया है कि ‘जीवन’ सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जानवरों का जीवन भी इसी अधिकार के दायरे में आता है। इसलिए न्याय के हित में जानवरों को भी संरक्षण दिया जाना चाहिए।
अदालत से आग्रह किया गया है कि धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान होने वाली पशु बलि को रोकने के लिए नए और सख्त कानून बनाए जाएं। याचिका में कहा गया है कि शुरुआती समय में मंदिरों में पशु बलि की परंपरा में कमी आई थी, लेकिन बाद के दौर में स्थानीय संस्कृतियों के प्रभाव से यह प्रथा फिर से हिंदू धर्म के कुछ हिस्सों में लौट आई है। वहीं याचिका में यह भी कहा गया है कि आज भी इंडोनेशिया के बाली, नेपाल और भारत के कुछ इलाकों जैसे हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा और बंगाल के कुछ हिस्सों, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में पशु बलि की परंपरा जारी है।
बतादें आम तौर पर बलि के लिए जवान और स्वस्थ नर पशुओं को चुना जाता है। कुछ दुर्लभ मामलों में लोग अपने बच्चों या खुद को भी देवी-देवताओं को समर्पित करने की बात करते हैं। याचिका में कहा गया है कि इस प्रथा को रोकने के लिए व्यापक कदम उठाने की जरूरत है। इसमें कड़े कानून बनाने, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर अभियान चलाने की बात कही गई है।
