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चीन और ब्रिटेन ने किसी भी कदम की पुष्टि नहीं की, जापान भी तुरंत दखल से बचता दिखा
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत तैनात करने की तैयारी का ऐलान किया और अन्य देशों से भी इसे करने की अपील की। हालांकि, चीन, ब्रिटेन और जापान ने तुरंत इस अपील का समर्थन नहीं किया, जिससे अमेरिका इस इलाके में अकेला पड़ता दिखा है।
चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि चीन किसी भी दुश्मनी को तुरंत रोकने की मांग करता है और सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे ऊर्जा सप्लाई को स्थिर और बिना रुकावट सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि चीन मध्य पूर्व के देशों का मित्र और रणनीतिक साझेदार होने के नाते तनाव कम करने और शांति बहाल करने में रचनात्मक भूमिका निभाएगा।
ब्रिटेन ने भी स्पष्ट किया कि वह फिलहाल सहयोगियों के साथ शिपिंग सुरक्षा के विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन किसी निश्चित कदम की पुष्टि नहीं की। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा कि कई देश, खासकर वे जो ईरान की होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश से प्रभावित हैं, अमेरिका के साथ मिलकर वॉरशिप भेजेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की 100 प्रतिशत सैन्य क्षमता पहले ही खत्म कर दी गई है।
ट्रंप ने विशेष रूप से चीन, फ्रांस, जापान, साउथ कोरिया और ब्रिटेन का नाम लिया और उम्मीद जताई कि ये देश स्ट्रेट को सुरक्षित और फ्री करने में अमेरिका का साथ देंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की योजनाएं पूरे मध्य पूर्व पर कब्जा करने और इजरायल को नष्ट करने की अब खत्म हो चुकी हैं।
जापान ने होर्मुज में तुरंत नौसैनिक दखल से बचते हुए संकेत दिया कि इस समय युद्ध जैसी स्थिति में युद्धपोत भेजना आसान निर्णय नहीं होगा। जापान की सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नीति प्रमुख तकायुकी कोबायाशी ने इसे ‘बहुत ऊंची बाधाओं’ वाला फैसला बताया।
इस तरह, ट्रंप की अपील के बावजूद अमेरिका फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में अकेला नजर आता है, और अन्य बड़े देश स्थिति की गंभीरता और जोखिम का आकलन कर आगे बढ़ने से बच रहे हैं।

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