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नई दिल्ली। धार्मिक स्वतंत्रता पर यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम (यूएससीआईआरएफ) की रिपोर्ट के बाद अब यह सवाल उठाये जा रहे हैं कि क्या अमेरिका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है? इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की राजनीतिक व्यवस्था धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध भेदभाव को बढ़ावा देती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सत्तारूढ़ भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गठजोड़ ऐसे ‘भेदभावपूर्ण’ कानूनों को प्रोत्साहन देता है।
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा समर्थित इस द्विदलीय आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने निष्कर्ष दिया कि “धर्म या आस्था की स्वतंत्रता के लिए कुछ संवैधानिक सुरक्षा मौजूद होने के बावजूद, भारत की राजनीतिक व्यवस्था धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति भेदभावपूर्ण माहौल तैयार करती है।”
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भाजपा और आरएसएस के ‘परस्पर संबंध’ के चलते नागरिकता, धर्मांतरण-विरोधी और गोहत्या से संबंधित कई कानून बनाए और लागू किए गए, जिन्हें आयोग ने भेदभावपूर्ण बताया है।
यूएससीआईआरएफ ने कहा है कि इन कानूनों का क्रियान्वयन धार्मिक अल्पसंख्यकों को असंगत रूप से निशाना बनाता है और उनके धर्म या आस्था का स्वतंत्र रूप से पालन करने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह स्थिति इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन सिविल एंड पोलिटिकल राइट्स के अनुच्छेद 18 के विपरीत है, जिस पर भारत हस्ताक्षरकर्ता है। रिपोर्ट में गुजरात दंगों का भी उल्लेख है।
रिपोर्ट के अनुसार, धर्मांतरण-विरोधी कानूनों के तहत सैकड़ों ईसाइयों और मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें कहा गया है कि भारत में 70% कैदी मुकदमे से पहले ही जेल में बंद रहते हैं, और उनमें धार्मिक अल्पसंख्यकों का अनुपात असंगत रूप से अधिक है।
रिपोर्ट में उमर खालिद के मामले का उल्लेख किया गया है, जिन्हें 2020 से हिरासत में रखा गया है, जबकि उन्होंने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।
आपको बता दें कि भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले ही इस रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा कि यूएससीआईआरएफ नामक यह अमेरिकी संस्था लगातार ‘पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित आकलन’ प्रस्तुत करती है।

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