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पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और मप्र सरकार से पूछा- 320 पेजों की शिकायत पर अब तक क्या हुआ?

दिल्ली/भोपाल। व्यापमं महाघोटाले की जांच की आंच एक बार फिर तेज होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि सकलेचा द्वारा दी गई 320 पन्नों की डिटेल शिकायत पर अब तक क्या एक्शन लिया गया?
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने आदेश दिया कि जांच एजेंसी और राज्य शासन अब तक की गई पूरी जांच और दाखिल चार्जशीट का ब्यौरा शपथ पत्र (एफिडेविट) के साथ पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की गई है। सकलेचा की ओर से सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा , सर्वम रितम खरे , विपुल तिवारी, इंद्रदेव सिंह मौजूद थे। वहीं शासन की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल श्रीधर पोटराजू, सीबीआई की और से दविंदर पाल सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा।
हाईकोर्ट ने कर दी थी याचिका खारिज
दरअसल, इंदौर हाईकोर्ट ने अप्रैल 2024 में सकलेचा की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे इस मामले में सीधे तौर पर प्रभावित पक्ष नहीं हैं। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सकलेचा के वकील विवेक तन्खा और उनकी टीम ने दलील दी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतकर्ता की भूमिका अहम होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए जवाब तलब किया है।

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