
मध्य प्रदेश के सांसद चौधरी ने पत्रकारों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने रखी मांग
नई दिल्ली। पत्रकारों की सुरक्षा और उनके कल्याण को लेकर लोकसभा में शुक्रवार को अहम मुद्दा उठाया गया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने सरकार से पत्रकारों के लिए एक समग्र और प्रभावी सुरक्षा एवं कल्याण नीति बनाने की मांग की । मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम से सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग के दौरान कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पत्रकारों को यात्रा में पहले की तरह 50 प्रतिशत रियायत फिर से बहाल की जाए, जिससे उन्हें काम के दौरान सहूलियत मिल सके।
सांसद ने पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा की व्यापक व्यवस्था करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारों के बच्चों के लिए शिक्षा में सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल पत्रकारों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि उनके मनोबल को भी बढ़ाएगा।
सांसद चौधरी ने आवास से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकारों को आवास या प्लॉट आवंटन की सुविधा दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि स्थायी आवास व्यवस्था पत्रकारों के जीवन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाएगी।
टोल टैक्स में रियायत देने की मांग
इसके अलावा सांसद चौधरी ने नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स में रियायत देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को लगातार यात्रा करनी पड़ती है, ऐसे में यह राहत उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगी। साथ ही, बदलते समय के साथ पत्रकारिता के स्वरूप को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एआई आधारित जर्नलिज्म के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की भी आवश्यकता बताई।
पत्रकारिता पेशा नहीं एक मिशन
सांसद चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन है। यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो सत्ता को जवाबदेह बनाता है और समाज को जागरूक करता है। उन्होंने कहा कि जहां कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को विभिन्न प्रकार की सुरक्षा और संस्थागत सुविधाएं प्राप्त हैं, वहीं पत्रकारों को भी उसी अनुपात में संरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चाहे पत्रकार फील्ड में रिपोर्टिंग कर रहे हों या किसी संवेदनशील मुद्दे को उजागर कर रहे हों, उन्हें कई तरह की चुनौतियों और असुरक्षाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार द्वारा एक ठोस और प्रभावी नीति बनाए जाने की मांग उन्होंने सदन में रखी है।
