कोर्ट ने पत्नी के आरोपों में विरोधाभास मानते हुए क्रूरता को माना आधार

जयपुर। फैमिली कोर्ट जयपुर महानगर प्रथम (क्रम संख्या-4) ने 19 मार्च 2026 को पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत पत्नी की वैवाहिक अधिकार बहाली की याचिका खारिज कर दी, जबकि धारा 13 के तहत पति की तलाक याचिका मंजूर कर दी। दोनों की शादी 22 फरवरी 2016 को हुई थी और उनके एक बेटी भी है। पत्नी ने कोर्ट में दावा किया कि शादी के बाद उसे दहेज को लेकर परेशान किया गया। उसने बताया कि कम सामान लाने पर ताने दिए गए, उसे जादू-टोना कहकर अपमानित किया गया और कई बार गाली-गलौज और मारपीट भी हुई। पत्नी का कहना था कि उसे घर से निकाल दिया गया और इसी वजह से उसने पति के साथ रहने का कोर्ट से आदेश मांगा। पति ने इन सभी आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि पत्नी अक्सर झगड़ा करती थी, उन्हें और उनके परिवार को गालियां देती थी और कई बार पुलिस बुला लेती थी। पति ने यह भी कहा कि पत्नी ने दहेज के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। कोर्ट में पति ने इन घटनाओं को मानसिक और शारीरिक क्रूरता बताया और इसी आधार पर तलाक मांगा। कोर्ट ने दोनों पक्षों के बयान, सबूत, जिरह और महिला आयोग में दी गई शिकायतों को देखा। अदालत ने पाया कि पत्नी के बयान में कई विरोधाभास हैं और वह यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि कब और क्यों स्थायी रूप से अलग हुए। अदालत ने नोट किया कि 2017 में गंभीर आरोप लगाने के बाद भी दोनों कुछ समय तक साथ रहे। कोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज कर दी और पति की तलाक याचिका मंजूर कर दी। अदालत ने माना कि पत्नी अपने आरोप साबित करने में असफल रही, जबकि पति ने क्रूरता का प्रमाण पेश किया।
