
महिलाओं ने लड्डुओं का भोग लगाकर की तुलसी माता की पूजा
अशोकनगर। इस बार तिथियों के घट-बढ़ के कारण शरद पूर्णिमा दो दिन मनाई गई है। बुधवार को जहां शहर के विभिन्न मंदिरों में धार्मिक आयोजन हुए, महिलाओं ने व्रत रखकर पूजा अर्चना की, तो वहीं गुरुवार को भी शरद पूर्णिमा पर बाल्मीकि समाज ने महर्षि वाल्मीकि की शोभायात्रा बैंडबाजों के साथ निकाली।
चल समाराहे पठार मोहल्ला स्थित बाल्मीकि मंदिर से शुरू होकर शहर की प्रमुख सड़कों से होता हुआ वापिस मंदिर पहुंचा। इस दौरान जगह-जगह नगरवासियों ने महर्षि बाल्मीकि के जयकारे लगाए एवं पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। मंदिर पर विधि विधान से महर्षि वाल्मीकि की पूजन अर्चन कर आरती की गई। इस अवसर पर समाज जनों द्वारा भण्डारा का भी आयोजन किया गया। वाल्मीकि समाज के लोगो ने बताया कि प्रत्येक वर्ष अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाई जाती है। महर्षि वाल्मीकि के द्वारा ही हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण महाकाव्य रामायण की रचना की गई थी। वाल्मीकि द्वारा संस्कृत भाषा में लिखी गई रामायण को सबसे प्राचीन माना जाता है।
माता तुलसी की हुई पूजा:
महिलाओं ने भगवान सत्यनारायण, माता तुलसी की पूजा अर्चना करते हुए संतान सुख, पति के लिए मंगलकामना करते हुए व्रत रखा। घरों के तुलसियाने में महिलाओं ने डेढ़ पाव खोवा, डेढ़ पाव शक्कर के छह लड्डू बनाकर उनका भोग तुलसी माता को लगाया और भगवान सत्यनारायण की पूजा कर कथा का श्रवण किया। इसके बाद एक लड्डू तुलसी को अर्पण कर, एक लडडू भगवान को अर्पण किया। एक लड्डू बाल गोपालों को, एक लड्डू गर्भवती महिला, एक पति और अंतिम एक सखी को दिया। महिलाएं बताती हैं कि ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से माता तुलसी, भगवान सत्यनारायण मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
