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मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में एचडीएफसी बैंक को निर्देश दिया है कि वह साइबर ठगी का शिकार हुए एक ग्राहक को 38 लाख रूपये की राशि उसके खाते में वापस जमा करे। अदालत ने यह आदेश रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के 6 जुलाई 2017 के सर्कुलर के आधार पर दिया। न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ ने सुनाए अपने फैसले में कहा कि आरबीआई का यह सर्कुलर ऐसे ग्राहकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए है, जो सतर्क रहते हैं और जिनकी कोई लापरवाही नहीं होती। दरअसल पुणे के कंसल्टेंट सुभोध कोर्डे ने याचिका में बताया कि 14 जुलाई 2021 को मात्र 41 मिनट के भीतर उनके एचडीएफसी बैंक के दो खातों से 38 लाख रूपये की अवैध निकासी कर ली गई। यह निकासी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए की गई थी।
कोर्डे के अनुसार उन्हें किसी भी ओटीपी की जानकारी नहीं मिली और उनके खाते में तीन नए अनजान लाभार्थी जोड़ दिए गए। उनके बैंकिंग ट्रांजैक्शन की सीमा 4 लाख रूपये से बढ़ाकर 40 लाख रूपये तक कर दी गई। अदालत ने पाया कि यह मामला ‘सिम स्वैपिंग’ यानी सिम क्लोनिंग के जरिए की गई ठगी का है। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने नेटवर्क समस्या के कारण एक बार नया सिम लिया था, लेकिन टेलीकॉम कंपनी के अनुसार दो दिनों में चार बार सिम बदले गए। हाईकोर्ट ने माना कि ओटीपी संभवतः क्लोन किए गए सिम पर चला गया, जिससे ठगों ने लेनदेन को अंजाम दिया।

  • बैंक की लापरवाही पर सवाल
    हाई कोर्ट ने कहा कि ग्राहक ने समय रहते बैंक को सूचित किया और ग्राहक की कोई लापरवाही साबित नहीं हुई। बैंक ने केवल ओटीपी भेजने को ही अपनी जिम्मेदारी मान लिया। कोर्ट ने टिप्पणी की, “हैरानी की बात है कि बैंक ने इस मामले में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया।” हाईकोर्ट ने कहा कि आरबीएआई के नियमों के अनुसार, अगर ग्राहक की कोई गलती नहीं है तो उसे ‘जीरो लायबिलिटी’ का लाभ मिलना चाहिए। इसके बावजूद एचडीएफसी बैंक ने ग्राहक को यह लाभ नहीं दिया, जिसे अदालत ने गलत ठहराया।
  • बैंक की दलील खारिज
    बैंक ने तर्क दिया कि वह एक निजी संस्था है और इस मामले में रिट याचिका नहीं बनती।
    इस पर कोर्ट ने कहा कि बैंक एक scheduled बैंक है, यह आरबीआई के नियंत्रण में काम करता है। इसकी सेवाओं में सार्वजनिक हित जुड़ा है। इसलिए इसे ‘पब्लिक अथॉरिटी’ के दायरे में माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने एचडीएफसी बैंक को निर्देश दिया कि
    38 लाख रूपये की पूरी राशि ग्राहक के खाते में वापस जमा की जाए साथ ही ब्याज भी दिया जाए। यह भुगतान 8 सप्ताह के भीतर किया जाए।

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