
अमृतसर। पंजाब की भगवंत मान सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करने वालों के लिए आजीवन कारावास की सजा से जुड़े एक विधेयक को मंजूरी दी है। पंजाब सरकार ने ऐसा ‘बेअदबी’ की घटनाओं को रोकने और गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता को बनाए रखने के लिए किया है। मुख्यमंत्री भगवत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई सूबे के मंत्रिमंडल की बैठक में जागृत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी गई। इस कानून में ‘बेअदबी’ की घटना पर 5 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रस्ताव है।
पंजाब सरकार ने इस विधेयक को लेकर कहा कि बीते वक्त में श्री गुरु ग्रंथ साहिब और अन्य पवित्र ग्रंथों की ‘बेअदबी’ से जुड़ी कई घटनाएं हुई हैं, जिनसे जनमानस को गहरी ठेस पहुंची है और समाज में अशांति फैली है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 298, 299 और 300 में ऐसे अपराधों का प्रावधान तो है लेकिन उनमें प्रभावी रोकथाम के लिए पर्याप्त कठोर दंड नहीं दिया गया है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि धार्मिक पवित्रता की रक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए कड़े कानूनी उपाय करने की जरूरत है। सरकार ने कहा है कि गहन विचार-विमर्श के बाद भगवंत मान सरकार ने फैसला लिया है कि गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता की रक्षा करने और समाज में आपसी सम्मान, समझ और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए उचित कानूनी उपाय किए जाने जरूरी हैं।
पहले भी हुई थी कानून बनाने की कोशिश
इससे पहले 2016 और 2018 में पंजाब की विधानसभा ने गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान के मामलों में आजीवन कारावास सहित कठोर दंड का प्रावधान करने वाले विधेयक पारित किए थे। हालांकि, ये विधेयक कभी कानून नहीं बन पाए क्योंकि या तो इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली या कानूनी और संवैधानिक वजहों के कारण ये निरस्त हो गए। पंजाब में लंबे वक्त से ‘बेअदबी’ के मामलों में कड़े कानून की मांग की जा रही है। सिख समुदाय का एक शख्स पंजाब के समाना में ही बीएसएनएल टावर पर चढ़ गया था और उसने ‘बेअदबी’ विरोधी कड़े कानून को लागू करने की मांग की थी। वह एक साल से ज्यादा वक्त तक टावर पर ही चढ़ा रहा। पंजाब में ‘बेअदबी’ का मामला काफी संवेदनशील है। 2015 में बरगाड़ी बेअदबी कांड और बहबल कलां गोलीबारी की घटनाओं के बाद सूबे में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे।
