Spread the love

अदालत के आदेश की अनदेखी पर नाराजगी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले में छत्तीसगढ़ सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कोरबा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने एक आपराधिक मामले में बरी किए गए व्यक्ति को निर्धारित तिथि पर पेश न करने को “स्पष्ट और जानबूझकर उल्लंघन” करार दिया है। अदालत ने कोरबा एसपी को निर्देश दिया है कि वे 24 अप्रैल को सुबह व्ययक्तिगत रुप से पेश हों।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह सख्त रुख अपनाते हुए एसपी से पूछा है कि 20 अप्रैल 2026 को प्रतिवादी संख्या-2 की उपस्थिति सुनिश्चित न कराने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। यह मामला एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) से जुड़ा है, जिसमें हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आरोपी को आईपीसी की धारा 376 और एससीएसटी एक्ट 1989 के तहत दर्ज मामले में बरी कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि प्रतिवादी संख्या-2 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश किया जाए। 23 मार्च 2026 को कोर्ट ने आदेश दिया था कि अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी और उस दिन उसकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। हालांकि, उस दिन संबंधित पीठ उपलब्ध न होने के कारण सुनवाई टल गई थी। बाद में राज्य सरकार ने जानकारी दी कि 15 अप्रैल को प्रतिवादी को पेश कर दिया गया था और 20 अप्रैल की सुनवाई से छूट मांगी गई थी। लेकिन 20 अप्रैल को जब मामला दोबारा सूचीबद्ध हुआ, तब प्रतिवादी अदालत में मौजूद नहीं था। इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई और कहा कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया।
अदालत ने कोरबा एसपी को निर्देश दिया है कि वे 24 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और साथ ही प्रतिवादी संख्या-2 की भी उपस्थिति सुनिश्चित करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *