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कोर्ट ने 27 अप्रैल को तीनों कार्यकर्ताओं को पेश करने का दिया आदेश

एपमी और राजस्थान पुलिस से मांगा स्पष्टीकरण
जबलपुर। राजधानी भोपाल में राजस्थान साइबर पुलिस द्वारा गोपनीय कार्रवाई करते हुए कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। परिजनो ने जहॉ पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे अपहरण करार देते हुए थाना कोहेफिजा में शिकायत की है। वहीं जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका भी दायर की गई है। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक तथाकथित वायरल पत्र के मामले में भोपाल से कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। पुलिस में शिकायत करने वाले आमिर का आरोप है कि उनके भांजे बिलाल और उसके दो साथियों, निखिल व इनाम को राजस्थान पुलिस के अधिकारी बताकर कुछ लोग अपने साथ ले गए। परिजनों के मुताबिक जब उन्होनें बस सबंध में पूछताछ की तब उन्हें गुमराह करते हुए बताया गया कि तीनों को कोर्ट ले जाया जा रहा है, और वे जमानत की तैयारी करें। लेकिन न तो उन्हें किसी स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया और न ही उनका नियमानुसार मेडिकल कराया गया। परिजनों का कहना है, कि उन्हें बिना किसी आधिकारिक सूचना के अज्ञात स्थान पर ले जाना कानूनन गलत है और यह सीधे तौर पर अपहरण की श्रेणी में आता है।

जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर
मामले में आरोपी बनाए गए कांग्रेस की आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं ने जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। याचिका पर बुधवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा एवं जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए आदेश दिए कि राजस्थान पुलिस 27 अप्रैल को तीनों कार्यकर्ताओं को पेश करे। मामले में मप्र और राजस्थान पुलिस स्पष्टीकरण भी दे। कैसे, क्यों और किन हालातों में हुई गिरफ्तारी ये पुलिस बताए। इसके अलावा हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से जुड़े 20 से 21 अप्रैल के सीसीटीवी फुटेज भोपाल पुलिस को पेश करने के आदेश थी दिए हैं। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में राज्य सरकार, एसपी भोपाल और साइबर पुलिस को पक्षकार बनाया गया है।

यह है मामला
यह पूरा विवाद राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल हुए एक तथाकथित पत्र से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इस पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल करने के तार भोपाल स्थित कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े हैं। इसी कड़ी में साक्ष्य जुटाने राजस्थान साइबर पुलिस की टीम भोपाल पहुंची थी। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से वायरल कथित पत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह पत्र सोशल मीडिया पर था, जिसे कांग्रेस की आईटी सेल ने साझा किया। जिसे बाद में फेक बताया गया। इसके बाद भोपाल साइबर पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल के निखिल, बिलाल और इनाम को हिरासत मे लिया था।

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