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सीडीवी वायरस का कहर या सिस्टम की नाकामी? लगातार मौतों से घिरा कान्हा टाइगर रिजर्व
बालाघाट। विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक और दर्दनाक खबर सामने आई है। डी-2-20 (महावीर) के नाम से पहचाने जाने वाले नर बाघ की मौत ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते दो महीनों में 7 से 8 बाघों की मौत ने पूरे सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार कान्हा नेशनल पार्क के मुक्की परिक्षेत्र अंतर्गत मोहगांव बीट के कक्ष क्रमांक 156 में महावीर बाघ गंभीर अवस्था में मिला था। सुबह गश्ती दल ने बाघ को तड़पते हुए देखा और तत्काल इसकी सूचना पार्क प्रबंधन को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बाघ को बचाने की कोशिश शुरू की गई, लेकिन कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।
घटना के बाद क्षेत्र में वन अमले की गतिविधियां तेज हो गईं। एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत डॉग स्क्वॉड से मौके का निरीक्षण कराया गया। तीन डॉक्टरों की टीम ने बाघ के शव का पोस्टमार्टम किया। प्रारंभिक जांच में बाघ के शरीर पर चोट के निशान और फेफड़ों में संक्रमण पाया गया है। हालांकि, वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।
विशाल शरीर और शांत स्वभाव के लिए था लोकप्रिय
महावीर की उम्र करीब 5-6 वर्ष बताई जा रही है। वह अपने विशाल शरीर और शांत स्वभाव के कारण पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय था। उसके दीदार अक्सर किसली और मुक्की जोन में होते थे। राहत की बात यह रही कि बाघ के सभी अंग — केनाइन दांत, नाखून और मूंछ के बाल सुरक्षित मिले हैं। फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल भी एकत्र किए गए हैं।
अपने ही घर में सुरक्षित नहीं जंगल का ‘राजा’
कान्हा में बाघों की मौत अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक खतरनाक संकेत है। अगर समय रहते सख्त और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट और गहराएगा। महावीर की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जंगल का ‘राजा’ अब अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है।
सीडीवी वायरस बना ‘मौत का कारण’, जिम्मेदारों की चुप्पी बरकरार
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों और शावकों की लगातार हो रही मौतों ने चिंता को चरम पर पहुंचा दिया है। हाल ही में सरही और किसली रेंज सहित कई क्षेत्रों में बाघों के शव मिले हैं। जांच में अधिकांश मामलों में फेफड़ों का संक्रमण और कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) को मौत की वजह बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक महावीर की मौत भी इसी खतरनाक वायरस से जुड़ी हो सकती है। बावजूद इसके, पार्क प्रबंधन अब तक इस संक्रमण को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति लागू करता नजर नहीं आ रहा है।
बड़े सवाल जो मांगते हैं जवाब
आखिर लगातार हो रही बाघों की मौतों का जिम्मेदार कौन?
क्या कान्हा जैसे बड़े टाइगर रिजर्व में निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है?
सीडीवी जैसे घातक वायरस पर नियंत्रण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?

इनका कहना है
महावीर बाघ की बीते कुछ दिनों से लगातार निगरानी रखी जा रही थी। मंगलवार को उसके मृत होने की सूचना मिली। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। बाघों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए पार्क प्रबंधन लगातार प्रयास कर रहा है।
-पीके वर्मा, डिप्टी डायरेक्टर, कान्हा टाइगर रिजर्व

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