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उद्धव ठाकरे का भाजपा पर तीखा हमला, बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग
मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि देश में कानून का शासन है तो दल-बदल करने वाले सांसदों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने विकास के लिए नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण पार्टी छोड़ी है।
मराठवाड़ा के दौरे पर निकले उद्धव ठाकरे ने रविवार को परभणी और धाराशिव में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी और शिंदे गुट पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाते हुए भाजपा को ‘बाबर जनता पार्टी’ तक कह दिया। उद्धव ठाकरे ने कहा कि बाबर ने राम मंदिर को तोड़ा था और अब भाजपा नए बने राम मंदिर को लूट रही है। उन्होंने सवाल किया कि दोनों में अंतर क्या है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा होने की संभावना है।
धाराशिव की सभा में ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा महाराष्ट्र की पहचान, शिवसेना की विचारधारा और मराठी अस्मिता को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के पास पहले से बहुमत है तो फिर उनके सांसदों को तोड़ने की आवश्यकता क्यों पड़ी। यह केवल बगावत नहीं बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र धर्म, मराठी स्वाभिमान और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ठाकरे ने आरोप लगाया कि राज्य की परियोजनाओं और संसाधनों को गुजरात ले जाने की राजनीति की जा रही है।
राम मंदिर मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और लंबे संघर्ष के बाद इसका निर्माण हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर को आस्था का केंद्र बनाने के बजाय राजनीतिक और आर्थिक लाभ का माध्यम बना दिया गया है। परभणी की सभा में उद्धव ठाकरे ने छह सांसदों के दल-बदल को ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेतृत्व अपने ही वरिष्ठ नेताओं के राजनीतिक कद को सीमित करता रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने शिवराज सिंह चौहान, नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस का उल्लेख किया।
गौरतलब है कि 22 जून को शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। इसके बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

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