हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी की ओर से दाखिल याचिका निरस्त की

जबलपुर। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि दुष्कर्म पीड़िता को केवल डीएनए रिपोर्ट आने के आधार पर दोबारा गवाही के लिए न्यायालय के समक्ष में नहीं बुलाया जा सकता। एकलपीठ ने कहा कि रिपोर्ट में हुई देरी का लाभ उठाकर आरोपी को पीड़िता को बार-बार न्यायालय में बुलाकर परेशान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस मत के साथ एकलपीठ ने छतरपुर निवासी आरोपी गोलू उर्फ करन अहिरवार की याचिका खारिज कर दी।
छतरपुर जिले के मतगुवां थाना क्षेत्र के ग्राम सकरोबारा निवासी एक महिला ने आरोपी गोलू उर्फ करन अहिरवार के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। इस मामले में ट्रायल के दौरान पीड़िता की गवाही पूरी हो चुकी थी। इसके बाद डीएनए रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत हुई। उक्त डीएनए रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोपी ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 311 के तहत पीड़िता को दोबारा बुलाकर प्रति-परीक्षण कराने की मांग की। ट्रायल कोर्ट ने उक्त आवेदन खारिज कर दिया, जिसके खिलाफ आरोपी ने उच्च न्यायालय की शरण ली थी।
उच्च न्यायालय में मामले पर सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाते हुए एकलपीठ ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट एक वैज्ञानिक दस्तावेज और विशेषज्ञ की राय है। इसे पीड़िता ने तैयार नहीं किया है और न ही उसे इसकी तकनीकी जानकारी है। इसलिए रिपोर्ट के संबंध में उससे दोबारा सवाल पूछने का कोई औचित्य नहीं बनता। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि कानून का उपयोग आरोपी अपने मुकदमे की कमियों को दूर करने या पहले की रणनीति सुधारने के लिए नहीं कर सकता। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि डीएनए रिपोर्ट तैयार करने वाले फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) के वैज्ञानिक अधिकारी से बचाव पक्ष पहले ही जिरह कर चुका है। ऐसे में उसी रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता को दोबारा न्यायालय में बुलाना केवल उसे अनावश्यक मानसिक उत्पीड़न झेलने के लिए मजबूर करना होगा, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट आने में हुई देरी का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को पीड़िता को बार-बार न्यायालय बुलाकर परेशान करने का अधिकार मिल जाए। इस टिप्पणी के साथ उच्च न्यायालय ने आरोपी की याचिका खारिज कर ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
