विवेचना के बाद श्वेता जैन, पत्रकार जितेन्द्र पुरोहित, रेशु चौधरी व पुलिस कांस्टेबल विनोद शर्मा को भी गिरफ्तार कर उन्हें सह-आरोपी बनाया था

इन्दौर। 25वें अपर सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार लौवंशी की कोर्ट ने कथित हनी ट्रैप व रंगदारी वसूली, धमकी और संगठित अपराध से जुड़े मामले में गिरफ्तार कथित पत्रकार जितेंद्र पुरोहित की प्रथम जमानत आवेदन पर सुनवाई उपरांत जमानत देने से इंकार कर आवेदन इस टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया कि प्रकरण अभी विवेचनाधीन है और इस स्तर पर आरोपी को जमानत देने से साक्ष्यों एवं जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सुनवाई दौरान अभियोजन पैरवी शासकीय अधिवक्ता योगेश जैसवाल ने की। उनके अनुसार अभियोजन कहानी इस प्रकार है कि शराब व्यापारी हितेन्द्र सिंह (चिंटू) ठाकुर ने दर्ज शिकायत में खुद को शराब व जमीन कारोबारी बता आरोपियों पर हनी ट्रेप कर करोड़ रुपयों की मांग और नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। शिकायत आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी को गिरफ्तार कर विवेचना के बाद श्वेता जैन, पत्रकार जितेन्द्र पुरोहित, रेशु चौधरी व पुलिस कांस्टेबल विनोद शर्मा को भी गिरफ्तार कर उन्हें सह-आरोपी बनाया था। पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार, मोबाइल फोन, फोटो, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड और कथित अनुबंध सहित अन्य सामग्री जब्त कर आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।
मामले में जितेंद्र की ओर से कोर्ट में जमानत आवेदन लगा कहा गया कि उसके खिलाफ लगाए आरोप निराधार हैं। जमानत आवेदन में जितेंद्र पुरोहित ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि उनका मामले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं और वर्तमान में उज्जैन संभाग में कार्यरत हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि उनकी 85 वर्षीय मां पूरी तरह उन पर निर्भर हैं और उनकी देखभाल करने वाला परिवार में कोई अन्य सदस्य नहीं है। जिस पर शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता योगेश जैसवाल ने जमानत आवेदन का विरोध करते हुए आरोपी की सक्रिय भूमिका होने का दावा करते कोर्ट को बताया कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई खुलासे हो रहे हैं, जिसमें आरोपितों द्वारा कई अन्य लोगों के महिलाओं के साथ संदिग्ध फोटो और वीडियो भी जब्त किए हैं। इसमें जितेंद्र की सक्रिय भूमिका है और उसके छूटने पर वो सबूत नष्ट करवा सकता है। कोर्ट ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की सह-आरोपी अलका दीक्षित के साथ संलिप्तता दिखाई देती है। चूंकि जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत दिए जाने पर साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। इन परिस्थितियों में आरोपी का प्रथम नियमित जमानत आवेदन निरस्त किया जाता है।
