
स्व-अर्जित संपत्ति पर उसके मालिक का पूर्ण अधिकार, वह उसे बेच सकता है
बेंगलुरु। कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रॉपर्टी के बंटवारे को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है किसी व्यक्ति को अपने पिता या दादा से मिली संपत्ति अपने आप पैतृक नहीं हो जाती। इसलिए प्रॉपर्टी पर बच्चों को जन्म से ही अधिकार नहीं मिल जाता। हाईकोर्ट ने कहा कि मिताक्षरा हिंदू कानून के तहत किसी संपत्ति का कानूनी स्वरूप इस बात से तय होता है कि वह मूलरूप से कैसे मिली। केवल इस आधार पर कोई संपत्ति पैतृक नहीं हो जाती कि वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।
बता दें पैतृक संपत्ति पर बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार होता है, लेकिन अब हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति ने अपनी कमाई से संपत्ति खरीदी और फिर उसे अपने बेटे को सौंप दी, तो पैतृक संपत्ति नहीं माना जा सकता। ऐसी स्व-अर्जित पर उस व्यक्ति के पोता-पोती का जन्मसिद्ध अधिकार नहीं होता। एक बेटी ने अपने पिता को दादा से पारिवारिक समझौते के जरिए मिली संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार के आधार पर हिस्सा मांगा था। हाईकोर्ट ने पाया कि जिस प्रॉपर्टी में हिस्सा मांगा जा रहा है, वह मूल रूप से दादा की स्व-अर्जित संपत्ति थी। पारिवारिक समझौते के बाद भी वह पिता की अलग संपत्ति ही बनी रही। इसलिए बेटी जन्मसिद्ध अधिकार के आधार पर उसमें बंटवारे की मांग नहीं कर सकती।
यह फैसला हिंदू उत्तराधिकार कानून में स्पष्टता लाया है। अक्सर यह माना जाता है कि माता-पिता या दादा-दादी से मिली हर संपत्ति अपने-आप पैतृक संपत्ति बन जाती है। पश्चिम बंगाल और असम को छोड़कर अन्य हिस्सों में लागू मिताक्षरा हिंदू कानून के मुताबिक जन्मसिद्ध अधिकार केवल सहभाजित या पैतृक संपत्ति में होता है। स्व-अर्जित संपत्ति पर उसके मालिक का पूर्ण अधिकार रहता है। वह उसे बेच सकता है, किसी को गिफ्ट में दे सकता है या वसीयत के जरिए अपनी मर्जी से इसका बंटवारा कर सकता है। अगर वह अपने बच्चों को यह प्रॉपर्टी न दे, तो वे उसके इस फैसले को चैलेंज नहीं कर सकते हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला उत्तराधिकार योजना, विरासत विवाद और संपत्ति बंटवारे के मामलों में अहम प्रभाव डालेगा। इस फैसले में कोर्ट ने परिवार के रिश्ते से ज्यादा इस बात पर जोर दिया है कि संपत्ति का मालिकाना हक किस आधार पर मिला। हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि बच्चों का पिता की संपत्ति पर हक पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अगर पिता ने कोई वसीयत नहीं बनाई है और उनकी मृत्यु हो जाती है, तो प्रॉपर्टी कानून के मुताबिक बच्चों और कानूनी वारिसों में ही बंटेगी, लेकिन अगर पिता अपनी ऐसी प्रॉपर्टी जो पैतृक नहीं है, किसी और के नाम वसीयत कर देते हैं, तो बच्चे उस पर जबरन दावा नहीं कर सकते।
