
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला विवाद में अंतरिम व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज के लिए विवादित परिसर के निकट एक निर्धारित भूखंड पर दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला परिसर के निकट उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इससे पहले अदालत ने विवादित परिसर में पूर्व व्यवस्था बहाल करने से इनकार करते हुए राज्य सरकार को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी ने दलील दी कि प्रशासन द्वारा प्रस्तावित स्थान भोजशाला परिसर से काफी दूर है, जबकि आसपास वक्फ संपत्तियों पर स्थित कई उपयुक्त भूखंड उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था संबंधी आशंकाओं के आधार पर धार्मिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता।
पीठ ने प्रस्तुत साइट प्लान का अवलोकन करने के बाद पीले रंग से चिह्नित भूखंड को उपयुक्त माना। अदालत ने कहा कि वहां तक पहुंचने के लिए स्वतंत्र मार्ग उपलब्ध है और यह परिसर के निकट स्थित है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश से पक्षकारों को आपसी सहमति से किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर नमाज अदा करने से नहीं रोका जाएगा। साथ ही राज्य प्रशासन को निर्देश दिया गया कि शुक्रवार की नमाज के लिए आवश्यक सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
