जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब

जबलपुर। मप्र उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया तथा न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की संयुक्तपीठ ने सडकों की जर्जर हालत को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पूछा है कि जब देश में न्यूक्लियर पावर प्लांट और समुद्र के नीचे मेट्रो बनाई जा सकती है, तो ऐसी सड़कें क्यों नहीं बनाई जा सकती जो वर्षों तक गड्ढामुक्त रहें। न्यायालय ने सडकों पर मौत के गडढों कों लेकर दायर याचिका को गंभीरता से लेते हुए मामले में केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई पांच अगस्त को नियत कर दी।
इंदौर के कल्याण संपत गार्डन निवासी व सेवानिवृत्त ट्रेन मैनेजर राजेन्द्र सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश की अनेक सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं। मामले मं सुनवाई के दौरान जनहित याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव मल्होत्रा ने पक्ष रखते हुए दलील दी कि आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद प्रदेश में टिकाऊ सड़कें नहीं बन पा रही हैं। उन्होंने पुणे की लगभग 50 वर्ष पुरानी सड़क का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां सड़कें दशकों तक सुरक्षित रह सकती हैं, तो मध्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण क्यों नहीं हो रहा। जनहित याचिका में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2023 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि वर्ष 2023 में मध्य प्रदेश में गड्ढों से संबंधित सड़क दुर्घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में 31.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन दुर्घटनाओं में 5,840 हादसे हुए और 2,161 लोगों की जान गई। याचिका में यह भी कहा गया कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया।
