
जांच पूरी होने से पहले हाईकोर्ट ने दी अहम नसीहत
जबलपुर। हाईकोर्ट ने कटनी में दर्ज 18 लाख की कथित धोखाधड़ी के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हो जाने से हर मामले में एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच प्रारंभिक चरण में हो और गंभीर आरोपों की जांच शेष हो, तो हाईकोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग कर आपराधिक कार्यवाही समाप्त नहीं करेगा।
मामले में कटनी के शनि चौक निवासी व्यापारी तीरथदास मोटवानी ने माधवनगर थाना, कटनी में दर्ज अपराध क्रमांक 185/2026 की एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में बताया गया कि शिकायतकर्ता से लिए गए 18 लाख में से उसने अपने हिस्से के 9 लाख लौटा दिए हैं, जिसके बाद उसके साथ समझौता हो गया।
हालांकि राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि मामले में सह-आरोपी के साथ कोई समझौता नहीं हुआ है। साथ ही जांच के दौरान आरोपियों द्वारा कथित रूप से जाली लेटर पैड तैयार कर रकम प्राप्त करने के आरोप सामने आए हैं, जिसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता की अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी गई हैं। सरकार ने यह भी बताया कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है और हस्तलेखन परीक्षण सहित कई महत्वपूर्ण जांच प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं।
जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने कहा कि जांच अभी शुरुआती अवस्था में है और आगे की जांच में अन्य अपराध भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में केवल समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करना न्यायोचित नहीं होगा।
अदालत ने याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। इसके साथ ही कटनी के माधवनगर थाने में दर्ज मामले की जांच जारी रखने के निर्देश प्रभावी रहेंगे।
