
जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से किया जवाब- तलब
जबलपुर। मप्र उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की संयुक्तपीठ ने सीधी जिले के एक माध्यमिक शिक्षक की विधायक रीति पाठक के यहां लिपिकीय कार्य के लिए की गई शिक्षक की पदस्थापना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में राज्य सरकार सहित संबंधित अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
सीधी जिले की गोपद बनास तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत चौफल कोठर की सरपंच शोभा यादव की ओर से दायर यह जनहित याचिका में कहा गया है कि गांव के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में हीरालाल यादव माध्यमिक शिक्षक के पद पर पदस्थ थे। आरोपित है कि जिला प्रशासन के आदेश के बाद उन्हें विधायक रीति पाठक के यहां लिपिकीय कार्य के लिए पदस्थ कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि शिक्षक का मूल दायित्व स्कूल में विद्यार्थियों को पढ़ाना है। उनके स्कूल में उपस्थित नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
याचिका में दावा किया गया है कि शिक्षा विभाग और स्कूल स्तर से शिक्षक को वापस विद्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद वे स्कूल में वापस नहीं लौटे। इसी आधार पर हाईकोर्ट से मांग की गई है कि शिक्षक को वापस उनके मूल विद्यालय में भेजा जाए, ताकि वे विद्यार्थियों को पढ़ाने का अपना मूल दायित्व निभा सकें।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह ने पक्ष खते हुए न्यायालय को अ0वगत कराया कि शिक्षक हीरालाल यादव को पहले कलेक्टर के आदेश से विधायक के यहां पदस्थ किया गया था। बाद में उन्हें वहां से हटा दिया गया, लेकिन इसके बाद अपर कलेक्टर के आदेश पर कथित रूप से दोबारा उसी स्थान पर पदस्थ कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था को नियमों के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। संयुक्तपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद याचिका में बनाए गए अनावेदक राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
