
हाईकोर्ट की हिदायत – आदेश का पालन न होने पर कलेक्टर और एमडी को पेश होना होगा
जबलपुर । उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक अग्रवाल और न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की संयुक्तपीठ ने अनूपपुर जिले में लगभ्रग एक दशक पहले अधिग्रहित 10 किसानों की जमीन का मुआवजा अब तक नहीं मिलने पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि मुआवजा पाने के लिए किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इस मत के साथ न्यायालय ने अनूपपुर कलेक्टर, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन (एमपीआरडीसी) को 10 दिन में किसानों को ब्याज सहित पूरा मुआवजा भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। संयुक्तपीठ ने इसके साथ ही यह भी हिदायत दी है कि आदेश का पालन नहीं होने पर कलेक्टर अनूपपुर के साथ ही दोनों एजेंसियों के एमडी को न्यायालय के समक्ष में तलब किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को नियत कील गइ है ।
प्रकरण के मुताबिक कोतमा थाना क्षेत्र के ग्राम बुरहानपुर निवासी ज्ञान सिंह और नौ अन्य किसानों की जमीनें नेशनल हाईवे-43 के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2016-17 में अधिग्रहित की गई थीं। जमीन अधिग्रहण के बाद भी मुआवजा नहीं मिलने पर प्रभावित किसानों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। मामले में सुनवाई के दौरान एनएचएआई और एमपीआरडीसी के बीच मुआवजे की राशि के भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर स्थिति सामने आई। इस पर संयुक्तपीठ ने दो टूक कहा कि दोनों सरकारी एजेंसियां हैं, किसान को इस विवाद में नहीं उलझाया जा सकता कि पैसा कौन देगा। न्यायालय ने निर्देश दिया कि दोनों में से कोई एक एजेंसी पहले किसानों को मुआवजा दे और बाद में दोनों आपस में राशि का हिसाब कर लें। न्यायालय ने 10 दिन की स्पष्ट समय-सीमा तय की है। साथ ही यह भी हिदायत दी है कि ब्याज सहित भुगतान नहीं होने पर अनूपपुर कलेक्टर के साथ एनएचएआई और एमपीआरडीसी के एमडी को न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा।
सुनवाई में बताया गया कि किसानों की शिकायतों के बाद कोतमा के भू-अर्जन अधिकारी एवं एसडीएम मिलिंद नागदेव को निलंबित किया गया था। इस पर उच्च न्यायालय ने अनूपपुर कलेक्टर को अगली सुनवाई में एसडीएम के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे ने पक्ष रखा।
