मृत बच्चों के परिजनों को मुआवजा देने और छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग

बालाघाट। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 29 अगस्त को लांजी आगमन के दौरान एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने बीमारी से बैगा बच्चों की मौत को लेकर प्रदर्शन कर आवाज उठाई। मृत बच्चों के परिजनों को शीघ्र आर्थिक सहायता राशि दिए जाने व महाविद्यालय के छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से शीघ्र कराने की मांग मुख्यमंत्री से की है। मांगों को लेकर एनएसयूआई जिलाध्यक्ष शिवम शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखना चाहते थे। लेकिन पुलिस द्वारा उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया। पुलिस की कार्यप्रणाली से प्रदर्शनकारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार लोकतंत्र की आवाज को दबाने का काम कर रही है। लेकिन उन्होंने कहा कि अन्याय व शोषण के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।
इस दौरान एनएसयूआई जिलाध्यक्ष शिवम शर्मा ने कहा कि बैहर क्षेत्र के बिरसा ब्लॉक में दूषित पानी व स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में करीब 25 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत हो गई है। लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा मृतकों का आंकड़ा छिपाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मृत बच्चों के परिजनों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता राशि भी प्रदान नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मृत बच्चों के परिजनों को सरकार द्वारा 50-50 लाख रूपए का मुआवजा दिया जाए। इसके लिए दोषी अधिकारियों पर भी उचित कार्यवाही किया जाए। इसके अलावा उन्होंने सरकार से मांग की है कि उच्च न्यायालय के आदेशानुसार छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से शीघ्र कराया जाए। जिससे विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी समस्याएं व मांगें उठाने का अवसर मिल सकें।
एनएसयूआई अध्यक्ष शिवम ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने जा रहे एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा रास्ते में ही रोक दिया गया। सरकार छात्रों और पीडि़त परिवारों की समस्याओं को सुनने के लिए तैयार है तो कार्यकर्ताओं को रोकने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन बैगा बच्चों की मौत के मामले में पीडि़त परिवारों को न्याय दिलाने व छात्र हित से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाता रहेगा।
