आरोपी ने स्पेशल जज पर जल्द जमानत मंजूर करने का बनाया था दबाव

नई दिल्ली । महाठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने एक गंभीर मामले में आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। सुकेश ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर निचली अदालत की जज को धमकाने की कोशिश की थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद उसे दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला अप्रैल 2017 का है। सुकेश भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस हिरासत में था। पुलिस कांस्टेबल मंजीत की हिरासत में रहते हुए सुकेश ने उसके मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया। सुकेश ने इस फोन से मामले की सुनवाई कर रही स्पेशल जज पूनम चौधरी के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल पर संपर्क किया। उसने खुद को पहले सुप्रीम कोर्ट के जज का प्राइवेट सेक्रेटरी और फिर खुद को सुप्रीम कोर्ट का सिटिंग जज बताया।
सुकेश ने स्पेशल जज पर अपनी जमानत जल्द से जल्द मंजूर करने का दबाव बनाया और बात न मानने पर नुकसान भुगतने की धमकी दी। कोर्ट ने उसकी इस हरकत पर सख्त टिप्पणी करते हुए इस कृत्य को संस्थागत अवहेलना बताया है। तीस हजारी कोर्ट की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा ने सुकेश चंद्रशेखर को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और पवित्रता पर सीधा हमला है।
रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने टिप्पणी की कि सुकेश ने अपनी इस मूर्खतापूर्ण नाटकीय प्रस्तुति में मर्यादा की सीमा लांघ दी। कोर्ट में अब कांस्टेबल की भूमिका पर जांच भी चल रही है। कोर्ट ने इस बात पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं कि सुकेश को पुलिस हिरासत में कांस्टेबल का फोन कैसे मिला? कोर्ट ने कांस्टेबल मंजीत की भूमिका की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया। फिलहाल इस फैसले के खिलाफ सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर निचली कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी है। सुकेश पर पहले से ही तिहाड़ जेल से 200 करोड़ रुपए से अधिक की रंगदारी और ठगी करने समेत कई अन्य मामले चल रहे हैं।
