सख्त सैलरी से मुआवजा वसूलने का आदेश

नई दिल्ली/प्रयागराज । राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए जैसे कठोर कानून के इस्तेमाल को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की एनएसए के तहत हिरासत को कोर्ट ने रद्द कर दिया। अदालत ने हिरासत को अवैध बताते हुए तत्काल रिहाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ रिहाई नहीं, बल्कि मुआवजे की रकम की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करना है।
हाईकोर्ट ने गैरकानूनी हिरासत के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है और इस रकम की वसूली गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी के वेतन से किए जाने का निर्देश दिया गया है। ऐसे आदेशों में सामान्य तौर पर आर्थिक भार सरकार या सरकारी खजाने पर पड़ता है, लेकिन इस मामले में अदालत के रुख से साफ संकेत मिलता है कि मनमानी प्रशासनिक कार्रवाई की कीमत संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जवाबदेही से भी जोड़ी जा सकती है।
11 अप्रैल को हिरासत, 13 मई को एनएसए
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर चुकी हैं। उन्हें नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में 11 अप्रैल को हिरासत में लिया गया था। बाद में 13 मई को उत्तर प्रदेश सरकार ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की। इसके बाद आकृति गौतम बुद्ध नगर की कासना जेल में बंद थीं। उनकी ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई और अदालत से हिरासत को चुनौती दी गई। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने मामले पर फैसला सुनाते हुए एनएसए के तहत हिरासत को रद्द कर दिया।
