
केंद्रीय सतर्कता आयोग की हालिया रिपोर्ट में खुलासा
नई दिल्ली । केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की हालिया रिपोर्ट ने बीते साल सरकारी संस्थानों के खिलाफ भ्रष्टाचार की भयावह तस्वीर पेश की है, जिसमें 70,500 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें सबसे अधिक शिकायतें बैंकिंग और रेलवे जैसे प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित थीं, जो इन विभागों में व्याप्त अनियमितताओं को दिखाती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) को कुल 70,584 शिकायतें मिली थीं। इसमें से बीते साल 31 दिसंबर तक 64,905 शिकायतों का निपटारा किया गया। हालांकि, 5,679 शिकायतें अभी भी लंबित थीं, जिसमें से 2,002 शिकायतें तीन महीने से अधिक समय से फंसी हुई हैं। सीवीओ से आमतौर पर 3 महीने के भीतर शिकायतों का निपटारा करने की अपेक्षा की जाती है, और आयोग लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करता है।
आंकड़ों के मुताबिक, बैंकों के सीवीओ को सर्वाधिक 9,933 शिकायतें मिलीं। इसमें से 9,520 का निपटारा हो गया, लेकिन 413 शिकायतें लंबित रहीं, जिसमें 52 शिकायतें 3 महीने से अधिक समय से लंबित थीं। रेलवे भी इस सूची में पीछे नहीं रहा, जहां 9,381 शिकायतें दर्ज की गईं। इसमें से 8,754 का निपटारा किया गया, जबकि 627 शिकायतें लंबित थीं, जिसमें से 10 शिकायतें तीन महीने से अधिक पुरानी थीं।
अन्य प्रमुख क्षेत्रों में आवास और शहरी मामलों से जुड़ी 6,531 शिकायतें, दिल्ली सरकार को छोड़कर स्थानीय निकायों से 4,834, कोयला क्षेत्र से 4,118, वित्त क्षेत्र से 3,107 और दिल्ली सरकार से 2,804 शिकायतें शामिल थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय के खिलाफ 2,722, दिल्ली पुलिस के खिलाफ 2,633 और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग क्षेत्र से संबंधित 2,139 शिकायतें भी प्राप्त हुईं। रिपोर्ट में सीवीसी द्वारा आवश्यक कार्रवाई के लिए सीवीओ को भेजी गई 18,651 शिकायतों का भी उल्लेख है, जिसमें स्थानीय निकायों (4,110), बैंकों (1,749) और रेलवे (1,428) से संबंधित शिकायतें शीर्ष पर थीं। यह रिपोर्ट सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी पर गंभीर सवाल उठाती है।
