
नवी मुंबई । नवीन पनवेल में पुनर्विकास परियोजना के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने और सीजीएसटी के स्वामित्व वाली 24 सदनिकाओं को पुनर्विकास के लिए सौंपने के बदले एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांगने वाले केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग के अधीक्षक को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। मामले में सीजीएसटी के एक सलाहकार को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों को अदालत ने दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंकज कुमार उर्फ पंकज राजपूत, अधीक्षक, लैंड एंड बिल्डिंग विभाग, सीजीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्तालय, रायगढ़ और प्रसाद कुमार स्वामी, सीजीएसटी सलाहकार के रूप में हुई है। सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई एक निजी रियल एस्टेट कंपनी के प्रोजेक्ट हेड की शिकायत के आधार पर की गई। संबंधित कंपनी नवीन पनवेल के सेक्टर-17 में स्थित दो इमारतों के पुनर्विकास का काम कर रही थी। इन इमारतों में 24 सदनिकाएं सीजीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क, रायगढ़ आयुक्तालय के स्वामित्व में हैं। बताया गया है कि पुनर्विकास परियोजना के लिए स्थानीय प्राधिकरणों से आवश्यक मंजूरियां पहले ही प्राप्त की जा चुकी थीं। इसके बावजूद इन 24 सदनिकाओं को पुनर्विकास के लिए सौंपने और एनओसी देने के बदले पंकज राजपूत ने कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने आरोपों का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत की मांग किए जाने की पुष्टि होने का दावा किया गया है।
तीन किस्तों में मांगी गई रकम
जांच के अनुसार, 10 सितंबर को कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत तीन हिस्सों में देने की मांग की गई थी। इसमें 10 लाख रुपये नकद, 20 लाख रुपये आरोपी अधिकारी द्वारा खरीदी गई एक सदनिका के डाउन पेमेंट के लिए और शेष 70 लाख रुपये बाद में सीजीएसटी के महानिदेशक, मानव संसाधन विकास (डीजी एचआरडी), नई दिल्ली में तैनात अन्य अधिकारियों के लिए देने की बात कही गई थी। सीबीआई के मुताबिक, पंकज कुमार ने शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये की नकद राशि सीजीएसटी सलाहकार प्रसाद कुमार स्वामी को सौंपने के लिए कहा। उस समय स्वामी भी कथित तौर पर मौके पर मौजूद था।
रिश्वत लेते ही दोनों दबोचे गए
सीबीआई की टीम ने कार्रवाई करते हुए पंकज कुमार और प्रसाद कुमार स्वामी दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने जांच के लिए हिरासत की मांग की। अदालत ने दोनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। सीबीआई अब कथित रिश्वतखोरी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि 70 लाख रुपये की कथित मांग में जिन अधिकारियों का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका क्या थी और क्या रिश्वत की रकम किसी बड़े अधिकारी या अन्य व्यक्ति तक पहुंचाई जानी थी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।
