
मराठा आरक्षण आंदोलन पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मनोज जरांगे पाटील को मुंबई आने से रोकने से इनकार
मुंबई । मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमाता नजर आ रहा है। मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील पिछले 14 दिनों से अंतरवाली सराटी में आमरण अनशन पर हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे। इसी बीच उन्होंने आज 12 सितंबर के बाद मुंबई की ओर कूच करने की चेतावनी भी दी है।
जरांगे पाटील के संभावित मुंबई आंदोलन के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर उन्हें मुंबई आने से रोकने और आजाद मैदान में आंदोलन की अनुमति नहीं देने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने उन्हें मुंबई आने से रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद जरांगे पाटील के मुंबई में आंदोलन करने का रास्ता फिलहाल खुला माना जा रहा है।
‘आंदोलन करना नागरिक का मौलिक अधिकार’
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल पिछले आंदोलन में जो कुछ हुआ, उसके आधार पर इस बार आंदोलन की अनुमति से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और अदालत इस अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़े नियम लागू नहीं होंगे। प्रशासन और पुलिस को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रहेगा।
आजाद मैदान में अनुमति नहीं देने की थी मांग
जरांगे पाटील के संभावित मुंबई आंदोलन को लेकर निलेश डहाणूकर और राजेश दलवी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं ने आजाद मैदान में आंदोलन की अनुमति नहीं देने की मांग की थी। उन्होंने पिछली बार हुए आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के मुंबई पहुंचने से दक्षिण मुंबई में यातायात और जनजीवन प्रभावित हुआ था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, पिछले आंदोलन के दौरान स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि हाईकोर्ट को आजाद मैदान खाली कराने के निर्देश देने पड़े थे। इसी आधार पर इस बार संभावित आंदोलन को लेकर पहले से रोक लगाने की मांग की गई थी।
12 तारीख के बाद मुंबई कूच की चेतावनी
मनोज जरांगे पाटील अंतरवाली सराटी में जारी अनशन के दौरान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। साथ ही 12 सितंबर के बाद मुंबई की ओर जाने की चेतावनी दी गई है। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती होगी। यदि जरांगे पाटील और उनके समर्थक मुंबई पहुंचते हैं तो आंदोलन के लिए स्थान, यातायात व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश महेश त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ के समक्ष हुई। अदालत के फैसले के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि जरांगे पाटील की अगली रणनीति क्या होगी और सरकार मराठा आरक्षण के मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाती है।
