Spread the love

ओरिएंटल इंश्योरेंस को 5.96 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश

जबलपुर। हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि दुर्घटना के समय बस का परमिट वैध नहीं होने के आधार पर बीमा कंपनी को दुर्घटना पीड़ित के आश्रितों को मुआवजा देने की वैधानिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को मृतक के आश्रितों को 5 लाख 96 हजार रुपये मुआवजा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।


मोटरसाइकिल को बस ने मारी थी टक्कर………….

मामला स्व. रूपनारायण यादव और उनकी पत्नी जानकी बाई के पुत्र एवं दामाद से जुड़ा है। प्रकरण के अनुसार रूपनारायण यादव के पुत्र गुड्डू उर्फ उमेश यादव की मोटरसाइकिल से जाते समय एक बस ने टक्कर मार दी थी। हादसे में उमेश यादव की मृत्यु हो गई, जबकि उसका दामाद घायल हो गया था।
घटना के संबंध में पुलिस ने बस चालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद मृतक की पत्नी जानकी बाई ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, जबलपुर के समक्ष मुआवजा दावा प्रस्तुत किया। अधिकरण ने सुनवाई के बाद 5 लाख 96 हजार रुपये का मुआवजा 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ स्वीकार करते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान का आदेश दिया था।


बीमा कंपनी ने परमिट को बनाया आधार………..
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के इस निर्णय को ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि दुर्घटना के समय बस मालिक के पास वैध परमिट नहीं था, इसलिए बीमा कंपनी मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी नहीं है। दूसरी ओर, दावेदारों की ओर से अधिवक्ता सुशील त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि दुर्घटना के समय बस मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम के साथ अनुबंधित थी। बस मालिक को अलग से परमिट प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं थी। साथ ही बस का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने किया था, इसलिए दुर्घटना में हुई मृत्यु के लिए बीमा कंपनी अपने वैधानिक दायित्व से बच नहीं सकत


हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की आपत्ति खारिज की…………..

न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने दावेदारों की ओर से प्रस्तुत तर्क को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी की आपत्ति खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बस का परमिट वैध हो या न हो, यदि बस का बीमा है तो बीमा कंपनी दावेदारों के प्रति अपने वैधानिक दायित्व से मुक्त नहीं हो सकती। हाईकोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह दावेदारों को 5 लाख 96 हजार रुपये की मृत्यु दावा राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से अदा करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *