हिरासत से रिहा होने के बाद नेहा ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर बोला हमला

नई दिल्ली। 12 घंटे की पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले लोगों के साथ कुख्यात अपराधियों जैसा सुलूक किया जा रहा है। सूर्यास्त के बाद महिलाओं को हिरासत में रखना किस कानून के तहत जायज है? आरके पुरम थाने से बाहर आने के बाद नेहा बोरा ने पुलिसिया कार्रवाई की कानूनी वैधता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को दिन या शाम को हिरासत में लेकर पूरी रात थाने में बैठाए रखा जाता है और अगले दिन छोड़ा जाता है। किस अधिकार या कानूनी प्रावधान के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? कानूनी रूप से महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में नहीं रखा जा सकता और उन्हें छोड़ दिया जाना चाहिए, लेकिन दिल्ली पुलिस खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही है। प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों पर अराजकता फैलाने के लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि नैरेटिव यह गढ़ा जा रहा है कि प्रदर्शनकारी अराजकता फैला रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि सेंट्रल दिल्ली को पुलिस छावनी बनाकर सरकार ने खुद अव्यवस्था फैलाई है। आम नागरिक अपने काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बैरिकेडिंग से बंद मिलता है, जिससे लोगों का चैन से जीना मुहाल हो गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नेहा बोरा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और व्यवस्था पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि देश के नागरिकों को बख्श दिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाया जाए और एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए, ताकि देश का आम नागरिक सुकून की सांस ले सके और उसके मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
