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नई दिल्ली । यौन उत्पीडऩ के मामले को सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच समझौता हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें नाबालिग छात्रा का यौन उत्पीडऩ करने के आरोपी शिक्षक को राहत दी गई थी और उसके खिलाफ मुकदमा रद्द करने का आदेश दिया गया था।
जस्टिस सीटी रविकुमार और पीवी संजय कुमार की पीठ ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त किया जाता है। एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही कानून के अनुसार आगे बढ़ाई जाए। हमने मामले की योग्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने सहायता करने के लिए एमिकस क्यूरी आर बसंत को भी धन्यवाद दिया। फैसला अक्टूबर 2023 में सुरक्षित रखा गया था। मामले में सवाल था कि क्या उच्च न्यायालय धारा 482 सीआरपीसी के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आरोपी और पीडि़ता के बीच समझौते के आधार पर यौन उत्पीडऩ के मामले को रद्द कर सकता है? मामला तब सामने आया, जब 15 वर्षीय लडक़ी के उत्पीडऩ के मामले में अपील की गई। इसमें पिता की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, बाद में लडक़ी के परिवार और आरोपी के बीच समझौता हो गया, जिसके आधार पर आरोपी ने मामले को रद्द करने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय का रुख किया। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और आपराधिक मामले को रद्द कर दिया।

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