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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट कॉलेजियम को उच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए जिला एवं सत्र अदालत के दो वरिष्ठ न्यायाधीशों के नाम पर फिर से विचार करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व्यक्तिगत रूप से सिफारिशों पर पुनर्विचार नहीं कर सकते। इस पर सिर्फ उच्च न्यायालय कॉलेजियम की ओर से ही सामूहिक रूप से गौर किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने दो वरिष्ठ जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के जज के तौर पर नामों के चयन में उनकी योग्यता और वरिष्ठता पर विचार नहीं किया।
नामों पर पुनर्विचार करने का फैसला सुनाया
पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हाईकोर्ट कॉलेजियम के सदस्यों की ओर से कोई सामूहिक परामर्श और विचार-विमर्श नहीं किया गया। ऐसे में हाईकोर्ट कॉलेजियम को अब 4 जनवरी, 2024 के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के फैसले का पालन करते हुए हाईकोर्ट के जज के तौर पर पदोन्नति के लिए चिराग भानु सिंह और अरविंद मल्होत्रा के नामों पर पुनर्विचार करना चाहिए। सुनवाई के दौरान दोनों न्यायिक अधिकारियों की ओर से उपस्थित हुए वकील ने 4 जनवरी के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रस्ताव और उसके बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को भेजे गए पत्र का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इनके अनुसार याचिकाकर्ताओं के नामों पर उच्च न्यायालय कॉलेजियम की ओर से विचार किया जाना चाहिए था।

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