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18 फीसदी जीएसटी दर घटाकर 5 फीसदी करने सहित चार विकल्प सुझाए जा सकते हैं


नई दिल्ली । वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की सोमवार को होने वाली बैठक में जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर टैक्स के मामले को लेकर कोई ‎निर्णय लिया जा सकता है। इससे सरकारी खजाने पर 6.5 अरब रुपये से 35 अरब रुपये तक की चपत लग सकती है। परिषद द्वारा नामित केंद्र और राज्यों के राजस्व अधिकारियों वाली फिटमेंट समिति ने इस मामले का विस्तृत विश्लेषण किया है। वित्तीय सेवाओं के विभाग द्वारा इस पर कर की दरें घटाने के अनुरोध के बाद यह कदम उठाया गया है। विभाग स्वास्थ्य बीमा पर कर की दर घटाकर इसे सुलभ और किफायती बनाना चाहता है। घटनाक्रम के जानकार अ​धिकारियों ने बताया कि फिटमेंट समिति इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट सौंप सकती है। इसमें सभी स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए जीएसटी से पूरी छूट देने और स्वास्थ्य बीमा सेवाओं पर मौजूदा 18 फीसदी की जीएसटी दर को घटाकर 5 फीसदी करने सहित चार विकल्प सुझाए जा सकते हैं। अन्य दो विकल्पों में वरिष्ठ नागरिकों के प्रीमियम और 5 लाख रुपये तक के बीमा कवर वाले प्रीमियम पर जीएसटी से छूट देना या केवल उन प्रीमियम पर छूट देना शामिल हैं जिनका भुगतान वरिष्ठ नागरिकों द्वारा पहले ही किया जा चुका है। इन चारों विकल्पों से सरकारी खजाने पर क्रमश: 3,495 करोड़ रुपये, 1,730 करोड़ रुपये, 2,110 करोड़ रुपये और 645 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। समझा जाता है कि समिति ने इस मामले पर निर्णय लेने का काम परिषद पर छोड़ा है। जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से छूट के मामले में समिति ने केवल विशुद्ध टर्म व्यक्तिगत जीवन पॉलिसियों और पुनर्बीमाकर्ताओं को छूट देने की सिफारिश की है। इससे सरकार को राजस्व का 213 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। हालांकि समिति ने यह सुझाव भी दिया है जीवन बीमा में कर पर मिलने वाली किसी भी तरह की छूट का लाभ बीमा कंपनियों द्वारा पॉलिसीधारकों को देना चाहिए। समिति ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य बीमा का कुल प्रीमियम करीब 90,032 करोड़ रुपये है। इनमें से व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा खंड की हिस्सेदारी 35,300 करोड़ रुपये है। 18 फीसदी की मौजूदा दर से व्य​क्तिगत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम से कुल 6,354 करोड़ रुपये की जीएसटी वसूली गई थी।

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