


पांढुर्णा /लोधीखेडा – भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर विगत दिनों जबलपुर के धर्म शास्र विधि विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित व्याख्यान माला में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागी रहे पूर्व न्यायधीश प्रकाश भाऊ उईके ने छात्रों के साथ अपने अनुभव साझा किये, उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के प्रयासों और आंदोलन के फलस्वरूप झारखंड में लागू छोटा नागपुर ट्नैंसी एक्ट 1910 के प्रावधानों पर चर्चा की छात्रों द्वारा प्रश्न किए जाने पर आर्टिकल 342 का उल्लेख कर बताया कि जनजाति समुदाय को उनकी विशिष्ट पहचान संस्कृति एवं परम्परा के लिए आरक्षण दिया गया है,जो जनजाति अपनी पहचान खो देता है,वह जनजाति नहीं रह जाता|विश्विद्यालय की और से प्रोफेसर जलज ने बताया कि उनके छात्र राज्य में लागू पेसा एक्ट एवं वन अधिकार दावे के प्रभावी क्रियान्वयन में भी अपनी भूमिका निभाना चाहते मैं| समाज सेवी श्री सुभाष बडोले ने बताया कि जनजाति समुदाय में अनेक ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने विदेशी शक्तियों से लोहा लिया उन्होंने बताया कि जनजाति समुदाय कभी गुलाम नही रह सकते|एनएलयूआई भोपाल के प्रोफेसर वीरपाल ने भी जनजाति समुदाय पर किए गए अपने अध्ययन की चर्चा की,साथ ही डॉक्टर धुर्वे ने छात्रों को नियमित रूप से अनुशासन के पालन का संदेश दिया|व्याख्यान माला कार्यक्रम में विश्विद्यालय के विधि छात्र ऋषभ भारती द्वारा संयोजक की भूमिका निभाई गई |इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र सहित विश्व विद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा|

